कछुआ और मगरमच्छ (Animal kahaniya)- Short kahani in hindi

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कछुआ और मगरमच्छ (Animal kahaniya)- Short kahani in hindi for children’s:

जंगल के अंदर, एक तालाब में मगरमच्छ का परिवार रहता था| उस परिवार में, एक छोटा मगरमच्छ भी था जो, बहुत शरारती था| वह सारा दिन, तालाब के अंदर इधर उधर घूमता रहता| एक दिन वह, पानी में मजे से तैर रहा था अचानक, उसे एक छोटा सा कछुआ दिखाई दिया| वह कछुए के पास पहुंचकर, उसके साथ खेलने लगा| कछुआ बहुत छोटा था| वह भी, छोटे से मगरमच्छ के साथ खेलने लगता है| कछुए को, मगरमच्छ की दोस्ती बहुत पसंद आती है| कुछ ही दिनों के अंदर, दोनों की मित्रता गहरी हो चुकी थी| दोनों रोज़ाना इसी तरह, एक दूसरे के साथ समय बिताने लगते हैं| धीरे धीरे समय गुज़रने लगा और दोनों की उम्र बढ़ने लगी| बढ़ती हुई उम्र के साथ ही, मगरमच्छ का आकार तो, लगातार बढ़ता जा रहा था लेकिन, कछुआ अभी भी, आकार में सामान्य ही था| एक दिन मगरमच्छ, कछुए से कहता है, “हम इतने दिनों से, अच्छे दोस्त हैं| मैं चाहता हूँ, तुम एक बार, मेरे परिवार के बाक़ी सदस्यों से मिलो ताकि, तुम्हारे और भी दोस्त बने|” कछुआ, मगरमच्छ की बात से सहमत होता है और वह, उसके साथ चलने को राज़ी हो जाता है| कुछ दूर पहुँचते ही, मगरमच्छ कछुये के सामने रुक कर हंसने लगता है|

कछुआ और मगरमच्छ (Animal kahaniya)
Image by downcametherain from Pixabay

अचानक, उसे अजीब तरह से हँसता देख, कछुआ घबरा जाता है| वह तुरंत, मगरमच्छ से हँसने की वजह पूछता है तभी, वह कहता है कि, “आज मेरे घर में खाने के लिए कुछ नहीं है इसलिए, मुझे मजबूरी में, तुम्हें अपने साथ ले जाना पड़ रहा है| तुम मुझे माफ़ करना| तुम से मेरी दोस्ती सच्ची है इसलिए, मैंने तुम्हें बता दिया|” मगरमच्छ की बात सुनते ही, कछुआ डर से सहम जाता है लेकिन, उसे पता था कि, मगरमच्छ का आकार उससे दोगुना है और वह, उससे बच कर नहीं भाग सकता लेकिन, फिर भी सच्चाई जानने के बाद, वह जानबूझकर मौत के मुँह में, कैसे कूद सकता था? कछुआ, चालाकी दिखाकर वहाँ से भागने की कोशिश करता है लेकिन, मगरमच्छ उसे अपने जबड़े में भर लेता है| कछुओं की मजबूत पीठ प्रकृति की देन हैं और उसी मजबूत ढाल की वजह से, मगरमच्छ उसे काट पाने में, सफल नहीं हो पा रहा था| कछुआ बार बार, उसके मुँह से बाहर निकल जाता और मगरमच्छ, उसे पकड़ने की कोशिश करता रहता|

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कई नाकाम कोशिशें करने के बाद, मगरमच्छ कछुए के सामने हार मान लेता है और असफल होकर, उल्टे पाँव भाग जाता है| मगरमच्छ के जाते ही, कछुये की जान में जान आ जाती है| मगरमच्छ के कपट के बारे में जानकर, पहली बार उसे अजनबी लोगों की, धोखेबाज़ी का पता चला था लेकिन, वह अंदर ही अंदर ख़ुश था क्योंकि, मगरमच्छ के हमले की वजह से, उसे अपनी पीठ के मज़बूत कवच का एहसास हो चुका था| इस घटना ने कछुओं को, जीवन में लोगों की पहचान करना सिखा दिया था|

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