सहेली (saheli) – छोटी सी कहानी लिखी हुई

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सहेली (saheli) – छोटी सी कहानी लिखी हुई (Short story):

दोस्तों का महत्व तो, सभी के जीवन होता ही है| लड़के जहाँ, अपने दोस्तों को अपना यार कहते हैं| वहीं, लड़कियाँ इस रिश्ते को सहेली कहती है| ऐसी ही दो सहेलियां, प्रिया और रोशनी एक कॉलेज में पढ़ती थी| दोनों में गहरी मित्रता थी| प्रिया हमेशा रोशनी की नक़ल करने की कोशिश करती थी| रोशनी जिस तरह के कपड़े ख़रीदती, प्रिया भी उसी तरह के कपड़े ले आती| वहीं रोशनी, अपने जीवन में बहुत उत्साहित रहती थी| दरअसल, वह आज़ाद ख्यालों की लड़की थी| उसके परिवार में, उसके लिए कोई दबाव नहीं था| लेकिन वहीं, प्रिया जैसे जैसे बड़ी हो रही थी, उसके घर वाले, उसकी शादी की चिंता करने लगे थे| प्रिया इस बात से हमेशा नाराज़ हो जाती थी| एक दिन प्रिया, अपने कॉलेज के लिए निकल रही थी| उसी समय उसकी माँ, उससे कहती है, “आज तुझे देखने के लिए, लड़के वाले आने वाले हैं| आज कॉलेज मत जाना” लेकिन प्रिया ग़ुस्से में, अपनी माँ से पूछती है, “आपने मेरी मर्ज़ी के बिना, मेरी शादी करने का फ़ैसला क्यों किया है?” तभी प्रिया की माँ, उसे समझाते हुए कहती है कि, “बेटी हमारे समाज में, लड़कियों की शादी इसी उम्र में होती है| यदि हमने ऐसा नहीं किया तो, हमारे ही समाज के लोग, हमें बुरा भला कहना शुरू कर देंगे और तुम्हारे चरित्र पर उंगलियां उठने लगेगी| इस बात को सुनते ही प्रिया नाराज़ होकर, कॉलेज चली जाती है और अपनी क्लास में जाकर, चुपचाप बैठ जाती है| रौशनी पहले से ही, क्लास में मौजूद थी| प्रिया को उदास देखकर, वह उससे पूछती है कि, “आज मेरी सहेली का मूड, क्यों ख़राब है?” प्रिया, रोशनी को अपने घर की कहानी सुनाने लगती है| रौशनी, प्रिया की बात को ग़ौर से सुनने के बाद कहती है कि, “तुम्हें अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले, ख़ुद करने लायक़ बनना होगा| तुम जिस भी समाज से आती हो, वहाँ लड़कियों को, इसलिए आज़ादी नहीं दी जाती क्योंकि, उन्हें लगता है कि, तुम अपनी ज़िंदगी का, सही फ़ैसला करने लायक नहीं हो| तुम्हें, अपने कर्तव्य से साबित करना होगा कि, तुम अपनी ज़िंदगी के निर्णय लेने में सक्षम हो|” प्रिया रोशनी से कहती है कि, “हम पढ़ तो रहे हैं और इसके अलावा, मैं क्या करूं? जिससे, मेरे माता पिता को, मुझ पर भरोसा हो सके|” तभी रोशनी उससे कहती है, “बात भरोसे की नहीं है| तुम्हारे घर वाले, तुम्हारी चिंता करते हैं और वह तुमसे प्यार भी करते हैं और वह अच्छे से जानते हैं कि, “अगर सही उम्र में, तुम्हारी शादी नहीं हुई तो, तुम्हारे रिश्ते आने में भी समस्या होने लगेगी लेकिन, यदि तुम अपने जीवन में, एक बड़ा लक्ष्य बना लो तो, तुम बिना शादी किए भी, एक बहुत ऊँचा और श्रेष्ठ जीवन, जी सकोगी| दुनिया में कितने लोगों ने, बिना जोड़ी बनाए, बड़े बड़े काम किए हैं| हम जोड़ी में, न ही पैदा होते और न ही मरेंगे| तो, जोड़े में रहना ज़रूरी कैसे हो सकता है? लेकिन, यह बात समाज को समझाना, नामुमकिन है इसलिए, मैं तुमसे कह रही हूँ|

सहेली (saheli) story in hindi
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यदि तुम अपनी ज़िंदगी में साधारण ज़िंदगी, नहीं जीना चाहती तो, तुम्हें एक बड़ा लक्ष्य बनाना ही होगा| तुम्हें अपनी ज़िंदगी का मक़सद समझना होगा| वह मक़सद नहीं जो, तुम्हें समाज के द्वारा बताया जा रहा है| बल्कि, वह मक़सद जो, तुम्हारे अंदर की आवाज़ बता रही है| प्रिया रौशनी की बातों में डूब जाती है| उसे ऐसा लग रहा था कि, उसकी सहेली ही, उसका गुरु है| प्रिया कहती है कि, “मेरे मन में ऐसा कोई बड़ा लक्ष्य नहीं है लेकिन, मैं अभी शादी नहीं करना चाहती|” रौशनी, प्रिया को समझाने की बहुत कोशिश करती है| प्रिया एक आदर्शवादी सामाजिक लड़की थी| वह समाज के नियम कानूनों के विरुद्ध जाकर, अपनी ज़िंदगी का फ़ैसला नहीं कर सकती थी| प्रिया स्कूल ख़त्म होते ही, अपने घर पहुँचती है| घर पहुँचते ही, उसकी माँ उसे डाँटना शुरू कर देती है और बैठकर रोने लगती है| अपनी माँ को रोते देख प्रिया, उन्हें चुप करवाते हुए कहती है, “माँ तुम जहाँ बोलोगी, जिससे बोलोगी, में शादी कर लूंगी लेकिन, मुझे थोड़ा समय दे दो ताकि, मैं अपनी स्कूल की पढ़ाई तो, पूरी कर लूँ|” प्रिया की बात सुनकर उसकी माँ ख़ुश हो जाती है| कुछ महीने गुज़रते ही, प्रिया और रोशनी की स्कूल की पढ़ाई पूरी हो जाती है| दोनों सहेलियां, अब अलग हो चुकी थी| प्रिया ने अपनी ज़िंदगी का फ़ैसला, अपने माता पिता के अनुसार कर लिया था| उन्होंने प्रिया की शादी, एक नौकरीपेशा लड़के से की| सभी प्रिया की शादी से बहुत ख़ुश थे| कुछ हद तक प्रिया को भी, अपनी शादी से ख़ुशी थी| धीरे धीरे प्रिया की ज़िंदगी आगे बढ़ने लगती है| बढ़ती हुई ज़िंदगी के साथ, ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ती जा रही थी| कुछ ही सालों के अंदर, प्रिया दो बेटियों की माँ बन चुकी थी| वह सारा दिन, घर का काम करती और अपने दो बच्चों को, पालने में ही सारा समय दे देती| ऐसे करते करते, कई साल गुज़र चुके थे| प्रिया की बच्चियाँ, अब बड़ी हो चुकी थीं| एक दिन प्रिया, घर का काम कर रही थी| उसी वक़्त उसे, अपनी बेटी के स्कूल बैग से, स्कूल के प्रोग्राम का आमंत्रण पत्र मिलता है| वह अपनी बेटी से पूछती है कि, “तुमने इस प्रोग्राम के बारे में मुझे क्यों नहीं बताया?” प्रिया की बड़ी बेटी कहती है, “मम्मी मैं भूल गई थी| कल ही यह प्रोग्राम है जिसमें, आपको और पापा को, हमारे साथ जाना होगा|” अगले ही दिन प्रिया, अपने पति और बच्चों के साथ, स्कूल का प्रोग्राम अटेंड करने पहुँच जाती है| स्कूल के प्रोग्राम में, सभी बच्चों के पेरेंट्स आए हुए थे| यह स्कूल, शहर का सबसे बड़ा स्कूल था| इसलिए यहाँ, शहर के कलेक्टर को, मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था| सभी बच्चे मंच पर अतिथि वंदना कर रहे थे| उसी वक़्त, कलेक्टर का क़ाफ़िला स्कूल में प्रवेश करता है|

छोटी सी कहानी लिखी हुई
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तालियों के बीच, पूरे स्वागत के साथ, कलेक्टर साहिबा को मंच में आमंत्रित किया जाता है| शहर की कलेक्टर, जैसे ही मंच पर आती है, प्रिया उन्हें देखते ही, आश्चर्यचकित हो जाती है| वह हड़बड़ाहट में, अपने पति और बच्चों से, कुछ बोलने की कोशिश करती है लेकिन, वह कुछ समझ नहीं पाते| दरअसल, यह कलेक्टर कोई और नहीं, बल्कि उसकी बचपन की सहेली, रौशनी होती है| रौशनी को मंच में देखते ही, प्रिया की आँखों में आँसू आ जाते हैं| रौशनी शहर की नई कलेक्टर बन चुकी थी| कलेक्टर साहिबा, मंच में सभी अभिभावकों और उनके बच्चों को, संबोधित करते हुए, भाषण दे ही रहीं थीं कि, अचानक उनकी नज़र, लोगों की भीड़ के बीच बैठी, प्रिया पर पड़ती है| वह तुरंत, वहीं रुक जाती है और मंच से ही, अपनी सहेली को आवाज़ लगाती है| प्रिया, यहाँ वहाँ देखने लगती है लेकिन, रौशनी के द्वारा, कई बार बुलाए जाने पर, प्रिया मंच की तरफ़ बढ़ने लगती है| स्कूल में आए हुए सभी अतिथि, सोच में पड़ गए थे कि, “ये कौन हैं, जिनके लिए कलेक्टर ख़ुद, मंच से नीचे आ रहीं हैं|” प्रिया, रोशनी के पास पहुँचते ही, रोने लगती है| उसे रोते देख वह, प्रिया को गले लगा लेती है| रोशनी, प्रिया को देखते ही समझ चुकी थी कि, “प्रिया अपनी ज़िंदगी में, ज़िम्मेदारियों के बोझ से दबी हुई है और वही पुरानी घिसी पिटी ज़िंदगी, जी रही है|” इसलिए रौशनी, उससे पहला सवाल पूछती है कि, “क्या तुम अपनी ज़िंदगी से ख़ुश हो?” इस बात के जवाब में प्रिया, रोशनी की तरफ़ मुस्कुराते हुए देखती है और कहानी ख़त्म हो जाती है|

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