अपमान (Apman)- A small moral story

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अपमान (Apman)- A small moral story in hindi:

हर पिता का सपना अपने बच्चे को एक बेहतर इंसान बनाने का होता है लेकिन, जब बच्चे ग़लत संगत में आकर भटक जाते हैं, तब दुनिया के सामने, सबसे ज़्यादा अपमानित, पिता ही महसूस करता है| ऐसी ही एक कहानी, राजीव की है| राजीव के पिता, सरकारी कार्यालय में चौकीदार थे लेकिन, वह अपने बेटे को एक अधिकारी बनाना चाहते थे जिसके लिए, उन्होंने दिन रात मेहनत करके कुछ पैसे जमा किए थे और उसी से, राजीव की पढ़ाई करवा रहे थे लेकिन, राजीव बहुत लापरवाह लड़का था| उसका पढ़ाई में एक भी मन नहीं लगता था हालाँकि, वह अपने पिता से बहुत प्यार करता था लेकिन, जब भी वह राजीव को पढ़ने के लिए कहते, वह नाराज़ हो जाया करता| राजीव के पिता को समझ में ही नहीं आ रहा था कि, वह अपने बच्चे को कैसे एक अधिकारी बनाए| एक दिन उन्होंने सोचा मैं अपने बेटे को एक IAS अधिकारी से मिलाता हूँ| शायद राजीव उनसे कुछ सीख जाए| अगले ही दिन वह राजीव को लेकर, कलेक्टर के कार्यालय पहुँच गए|

अपमान (Apman)
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कार्यालय के अंदर पहुँचते ही, वह कलेक्टर के सामने जाकर, बिना इजाज़त के कुर्सी में बैठ गए| उनके बैठते ही, कलेक्टर ने उन्हें उठने को कहा लेकिन, उन्होंने कुर्सी से उठने को मना कर दिया| तभी कलेक्टर ने उन्हें डांटते हुए, हाथ पकड़कर कुर्सी से उठा दिया और अपने दफ़्तर के बाहर निकाल दिया| राजीव खड़े होकर, यह सब देख रहा था| उसे अपने पिता का अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ लेकिन, राजीव एक साधारण लड़का था| कलेक्टर से उलझने की हिम्मत उसमें नहीं थी| वह डर चुका था| कलेक्टर के भगाते ही, राजीव अपने पिता के साथ घर आ जाता है| घर पहुँचते ही, वह अपने पिता का रोता हुआ चेहरा देखकर, अंदर से घुटन महसूस करने लगता है और वह तय करता है कि, अब वह भी एक IAS अधिकारी बनकर रहेगा| इस घटना के बाद राज़ीव बिलकुल बदल चुका था| वह रात दिन केवल अपनी पढ़ाई में ही जुटा रहता था| यहाँ तक कि, वह घूमना फिरना भी भूल चुका था| ऐसा लग रहा था कि, अब अधिकारी बनना उसकी ज़रूरत नहीं बल्कि, मजबूरी है| कुछ ही महीनों के कठिन परिश्रम के कारण, राजीव ने उच्चाधिकारी प्रशासनिक पद, प्राप्त कर लिया जिससे, राजीव के पिता को तो बहुत ख़ुशी हुई लेकिन, राजीव तो बदले की आग में झुलस रहा था| वह, उस अधिकारी से, अपने पिता की बेइज़्ज़ती का बदला लेना चाहता था इसलिए, वह IAS अधिकारी बनते ही, सबसे पहले अपने पिता को लेकर, उसके पास पहुँचता है जिसने, उसके पिता की बेइज़्ज़ती की थी लेकिन, जैसे ही वह अधिकारी राजीव को, IAS बने देखता है तो, वह ख़ुश हो जाता है| राजीव कुछ समझ नहीं पा रहा था क्योंकि, वह तो अपने पिता के अपमान का बदला लेने गया था लेकिन, यहाँ पहुँचते ही उसके पिता भी मुस्कुरा रहे थे|

A small moral story
Image by Jörg Peter from Pixabay

राजीव ने तुरंत अपने पिता से कहा, “यहाँ कोई मज़ाक चल रहा है| इस व्यक्ति ने आपका इतना अपमान किया था और आप भूल गए, जो इसके सामने पहुँचते ही, हँस रहे हैं| तभी राजीव के पिता ने कहा कि, “बेटा इनकी वजह से ही, तुम आज इतने बड़े अधिकारी बने हों| दरअसल, मैं एक दिन इन्ही के पास तुम्हारे लिए जानकारी इकट्ठी करने आया था लेकिन, इन्होंने तुम्हारी स्थिति जानकार मुझे सलाह दी है कि, तुम्हारे दिल में जब तक चोट नहीं लगेगी, तब तक तुम बदल नहीं सकोगे इसीलिए, हम दोनों ने योजना बनाकर, मेरे अपमान का नाटक किया और उसी नाटक ने, तुम्हें अंदर से परिवर्तित कर दिया और आज तुम जो हो, वो इन्ही की वजह से हो| राजीव को अपने पिता की बात समझ में आ चुकी थी| वह तुरंत अपने पिता और जीवन बदलने वाले गुरु के नाते, उस अधिकारी को सहृदय धन्यवाद देता है और इसी के साथ, ये कहानी ख़त्म हो जाती है|

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