आज का गुंडा- any moral story in hindi

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आज का गुंडा (Aaj ka Gunda)- any moral story in hindi:

सोशल मीडिया के ज़माने में गुंडागर्दी को महिमामंडित करके दिखाया जाता है इसलिए, आज के युवाओं में गुंडा बनने की होड़ सी लगी हुई है| आज का गुंडा (Aaj ka Gunda) कहानी एक ऐसी काल्पनिक घटना पर आधारित है जिससे, युवाओं को ज़िंदगी की सत्यता परखने में सहूलियत मिलेगी| शहर के एक कॉलेज में बड़े बड़े रईसों के लड़के पढ़ते थे| उन्हीं के बीच, रॉकी नाम का एक लड़का था| वह एक पुलिस वाले का लड़का था इसलिए, कॉलेज के कई लड़के उसे भाव दिया करते थे| रॉकी ज़्यादातर अपने मोबाइल पर गुंडागर्दी के वीडियो देखा करता था जिससे, उसके हाव भाव गुंडों की तरह हो चुके थे| रॉकी के ऐसे बर्ताव से उसके पिता हमेशा, उससे नाराज़ रहते थे लेकिन, अपनी नौकरी में व्यस्तता के कारण, वह अपने बेटे पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे| रॉकी सारे कॉलेज में अपना दबदबा बनाना चाहता था इसलिए, वह बेवजह लड़कों से उलझता रहता था| रॉकी का क्लास में अलग ही जलवा था| एक दिन रॉकी अपने दोस्तों के साथ लाइब्रेरी में बैठा था, उसी वक़्त एक ख़ूबसूरत लड़की लाइब्रेरी में दाख़िल होती है| रॉकी उसे घूरने लगता है लेकिन, लड़की किसी और लड़के के साथ जाकर बैठ जाती है और उससे बात करने लगती है| रॉकी को यह देखकर बहुत जलन होती है क्योंकि, रॉकी अपने आपको इस कॉलेज का हीरो समझता था| वह काफ़ी देर तक उस लड़की को घूरता रहा था अचानक, लड़की ने भी रॉकी की तरफ़ देखा और उसे देखते ही, अपना मुँह बिगाड़ते हुए, वहाँ से उठकर चली गई| रॉकी के दोस्त भी यह नज़ारा देख रहे थे| उन्होने रॉकी को लड़की के खिलाफ़ भड़का दिया| रॉकी अगले दिन कॉलेज पहुँचते ही सीधा, लड़की से मिलने पहुँचा लेकिन, वह लड़की आज कॉलेज नहीं आयी थी| रॉकी काफ़ी देर तक उसका इंतज़ार करता रहा लेकिन, जब उसका ग़ुस्सा बढ़ने लगा तो, वह लाइब्रेरी से उस लड़की का पता निकालकर, उसके घर पहुँच गया और दरवाज़ा खटखटाने लगा| दरवाज़ा खुलते ही, लड़की अपने भाई के साथ दरवाज़े पर खड़ी थी| रॉकी के सर में ग़ुस्सा सवार था| उसने निडरता से लड़की को बुरा भला कहना शुरू कर दिया| कुछ देर तक तो, लड़की का भाई खड़े खड़े रॉकी की बकवास सुनता रहा लेकिन, जब बात आपे से बाहर हो गई तो, उसने रॉकी को ज़ोर से धक्का मारकर, नीचे गिरा दिया| रॉकी ने खड़े होकर उसके भाई से लड़ने की कोशिश भी की लेकिन, रॉकी को पिटकर वापस आना पड़ा| वहाँ से आने के बाद, वह अपमान की आग में जल रहा था|

आज का गुंडा aaj ka gunda
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उसने अपने पिता को फ़ोन लगाया और उन्हें धमकी देते हुए कहा कि, “एक लड़के ने मुझे मारा है| आप उस लड़के को जेल में बंद करवाओ, नहीं तो मैं उसे जान से मार दूँगा|” रॉकी के पिता, अपने बेटे की हरकतों से पहले से ही परेशान थे इसलिए, उन्होंने रॉकी को फ़ोन पर डांटते हुए कहा, “तुम्हें जिस काम के लिए कॉलेज भेजा जाता है, वही काम करो| मेरे पास तुम्हारी फ़ालतू बकवास सुनने का समय नहीं है” और इतना कहते ही, उन्होंने फ़ोन रख दिया| रॉकी को अपने पिता की इस बात से इतना ग़ुस्सा आया कि, उसने लड़की के भाई से अकेले ही बदला लेने की ठान ली| रॉकी अपने दोस्तों के पास पहुंचकर, लड़के को सबक़ सिखाने की प्लानिंग करने लगा लेकिन, रॉकी के दोस्तों ने भी लड़ाई में उसका साथ देने से मना कर दिया| रॉकी इंतकाम की आग में जल रहा था लेकिन, उसे अब कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था| उसे रह रह कर अपनी पिटाई याद आ रही थी| अगर वह भूलने की कोशिश भी करता तो, उसके दोस्त उसे याद दिलाकर, झगड़े के लिए उकसाने लगते लेकिन, रॉकी हर बार अपने अपमान का घूँट पीकर रह जाता| एक दिन रॉकी सुबह सुबह अपने घर में अकेले बैठा था, तभी उसकी नज़र अपने पिता की रिवॉल्वर पर पड़ी| वह धीरे से रिवॉल्वर अपनी जेब में डाल कर, उसी लड़की के घर पहुँच गया| रॉकी ने ग़ुस्से में कई बार दरवाज़ा खटखटाया लेकिन, घर में कोई नहीं था| रॉकी ने तुरंत उस लड़की के पड़ोसी से उनकी जानकारी ली| तभी उसे पता चला की लड़की अपने भाई के साथ, किसी काम से बाहर गई है वह ग़ुस्से में वहाँ से निकल ही रहा होता है कि, तभी उसे वही लड़की अपने भाई के साथ आती हुई दिखाई देती है| वह तुरंत उनके सामने पहुँच जाता है|

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रॉकी को सामने देखकर लड़की उसे धमकी देते हुए कहती है, “पिछली बार की मार भूल गए क्या? जो फिर पिटने आए हो|” लड़की के इतना बोलते ही, रॉकी ने रिवॉल्वर निकालकर उसके भाई को गोली मार दी| फिर क्या था, चारों तरफ़ अफ़रा तफ़री मच गई| सारे इलाक़े में दहशत का माहौल हो गया| रॉकी की बंदूक देखकर उसके पास आने की हिम्मत किसी की नहीं थी| वह लड़के की हत्या करने के बाद बड़ी दिलेरी से, अपने घर वापस लौट आया| शहर में हत्या की वारदात से सनसनी फैल चुकी थी| कुछ ही घंटों के अंदर, रॉकी को गिरफ़्तार कर लिया जाता है| रॉकी के अपराध में फँसते ही, उसके पिता को भी अपनी रिवाल्वर की लापरवाही के कारण सस्पेंड होना पड़ता है हालाँकि, इसमें उनकी पूरी गलती थी| अगर उन्होंने अपने बेटे को सही समय पर सँभाल लिया होता तो, रॉकी को ये दिन ना देखना पड़ता| जेल में पहुँचते ही, रॉकी की हालत कुछ ही दिनों के अंदर ख़राब होने लगती है| रॉकी के ग़ुस्से ने अपने साथ साथ अपने पिता को भी रोड पर लाकर खड़ा कर दिया था| लड़की के भाई की हत्या के आरोप में रॉकी को 14 साल की सज़ा सुनाई जाती है| अपने बेलगाम ग़ुस्से की वजह से, रॉकी आज का गुंडा बन चुका था| आज रॉकी जेल में घुट घुटकर अपनी सजा पूरी कर रहा है और उसके सर से गुंडा बनने का भूत उतर चुका है और यही इस कहानी का दर्दनाक अंत है|

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