आज का बीरबल, बीरबल की कहानी

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आज का बीरबल, बीरबल की कहानी हिंदी में

अक़बर बीरबल की कहानियों में, आपने बीरबल की सूझ-बूझ और समझदारी के बहुत से क़िस्से, सुने होंगे लेकिन, यह कहानी प्रेम सिंह की है जो, अपनी अक्लमंद सोच की वजह से, आज का बीरबल कहलाता है| दरअसल प्रेम सिंह, अदालत के बाहर एक चाय की दुकान चलाता है| कई साल से, वकीलों की संगत में, रहते रहते प्रेम सिंह का दिमाग़ भी, वकीलों की तरह हो चुका था| छोटे मोटे मुद्दों को तो, वह बातों बातों में ही सुलझा दिया करता था| उसके इस काम से, कई वक़ील उससे नाराज़ भी रहते थे क्योंकि, प्रेम सिंह का निपटारा करने का तरीक़ा ही कुछ अलग था| उसकी बुद्धि, बीरबल से कम नहीं थी| उसके पास कई लोग, चाय पीने से ज़्यादा क़ानूनी मुद्दों को समझने आया करते थे| प्रेम सिंह ज़्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं था लेकिन, उसने ज़िंदगी की किताब से, क़ानून की परिभाषा, बख़ूबी समझी थी और इसलिए, उसे आज का बीरबल कहा जाता था| एक दिन अदालत में, एक केस को लेकर हलचल मची हुई थी| प्रेम सिंह ने, वकीलों से इस मुद्दे के बारे में जानना चाहा लेकिन, कुछ वकीलों ने उसका मज़ाक उड़ाते हुए, एक सामान्य चायवाला समझ कर, उसे नज़रअंदाज़ कर दिया| प्रेम सिंह को वकीलों का यह रवैया, अच्छा नहीं लगा इसलिए, वह मुद्दे की जानकारी के लिए, सीधा अदालत के अंदर पहुँच जाता है और वहाँ, उसे पता चलता है कि, एक लड़के ने, अपने माँ बाप पर केस किया है कि, वह उसे स्कूल की पढ़ाई करने के लिए, मजबूर करते हैं जबकि, वह अपने दिल से, कुछ और ही, करना चाहता है| लड़का नाबालिक था इसलिए, उसकी ज़िम्मेदारी तो, उसके माता पिता की ही थी लेकिन, लड़का अपने माता पिता से, अपनी ज़िंदगी के निर्णय लेने के लिए, आज़ादी चाहता था|

आज का बीरबल
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लड़के के पिता, एक अस्पताल के मालिक थे इसलिए, वह अपने बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे| यहाँ प्रेम सिंह चुपचाप, दोनों पक्षों के वकीलों की, बहस सुन रहा था जिसमें, माता पिता के पक्ष वाला वक़ील, दलील देते हुए कहता है कि, बच्चे को उसके जीवन के बारे में, प्राथमिक शिक्षा देना ज़रूरी है और यही बच्चे के प्रति, माता पिता का कर्तव्य है लेकिन, बच्चे की तरफ़दारी करने वाले वक़ील की, में भी दम था क्योंकि, लड़के के पक्ष का कहना था कि, वह पुरानी शिक्षा पद्धति के अनुसार, नहीं चलना चाहता| उसे ज़िंदगी में, कुछ अलग करना है इसलिए, वह अपनी, शिक्षा इंटरनेट के माध्यम से, स्वयं करना चाहता है जिसके, लिए, उसे किसी डिग्री की ज़रूरत नहीं| दोनों पक्षों की दलीलों से, न्यायाधीश सोच में पड़ जाते हैं क्योंकि, यह मुद्दा ही कुछ अलग था| आज तक, किसी लड़के ने, अपने माता पिता पर, इस तरह का केस, दायर नहीं किया था| उसी दौरान, प्रेम सिंह बात को गहराई से समझ रहा था| न्यायाधीश, क़ानूनन माता पिता को दोषी तभी मान सकते थे जब, उनकी तरफ़ से, बच्चे को शारीरिक या मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा हो लेकिन, किसी बच्चे को शिक्षा के लिए मजबूर करना, क़ानून की नज़र में प्रताड़ना नहीं थी| न्यायाधीश लड़के को समझाते हुए, केस वापस लेने को कहते हैं| उनके अनुसार, लड़के के द्वारा लगाया हुआ इल्ज़ाम, बेबुनियाद था| वह अपना फ़ैसला सुनाने ही वाले थे कि, अचानक प्रेम सिंह, अदालत में, सबके बीच खड़ा हो जाता है और कहता है, “जज साहब, आप मुझे बोलने का अवसर दें| मैं बच्चे के पक्ष में कुछ कहना चाहता हूँ|” प्रेम सिंह को, ऐसे बीच से उठकर बोलने की इजाज़त तो नहीं थी लेकिन, यह केस ख़ारिज होने जा रहा था इसलिए, न्यायाधीश, प्रेम सिंह को, अपनी बात रखने का, एक मौक़ा दे देते हैं| प्रेम सिंह, कठघरे बॉक्स में आकार, सभी से कहता है कि, “किसी भी बच्चे को, मजबूरी के तहत, ऐसी किसी तरह की शिक्षा ग्रहण नहीं करनी चाहिए जिसका, उसे अपने जीवन में, भी कोई अर्थ न समझ में आए|” प्रेम सिंह, अपनी बात में ज़ोर देते हुए कहता है कि, “अदालत को सबसे पहले, बच्चे के लिए गए निर्णय को, गहराई से समझने की ज़रूरत है तभी, आप किसी निर्णय पर पहुँच सकते हैं क्योंकि, आप किसी की उम्र के आधार पर, उसकी समझदारी को, प्रमाणित नहीं कर सकते हैं| तभी न्यायाधीश, लड़के को सबके सामने अपनी बात कहने को बुलाते हैं| लड़का कठघरे बॉक्स में आकर, न्यायाधीश के सामने कहता है कि, “मैं अपने चौदह वर्षों में, कई लोगों से मिला हूँ जिनसे, मुझे यही पता चला है कि, साधारण शिक्षा, मुझे पैसे और शौहरत तो दिलवा सकती है लेकिन, एक अच्छा इंसान बनना नहीं सिखा सकती इसलिए, मैंने अपने पिता के अस्पताल में डॉक्टर बनने से मना कर दिया क्योंकि, मैं केवल इंसानों के लिए नहीं, इस प्रकृति पर मौजूद सभी जीव जन्तुओं के लिए, सेवाएँ देना चाहता हूँ और मैं, अपनी स्वयं की शिक्षा प्राप्त करने के, क़ाबिल हूँ| बच्चे की बात सुनकर, न्यायाधीश फ़ैसला करते हैं कि, “बच्चे की बातों में, एक अंदरूनी सच्चाई है क्योंकि, लड़के की इच्छा है कि, वह आगे चलकर, देश के लिए समर्पित हो| उसका नजरिया, कुछ अलग ज़रूर है लेकिन, वह देश के हित में है इसलिए, अदालत उसे, उसकी मर्ज़ी से, शिक्षित होने की, अनुमति देती है|

बीरबल की कहानी
Image by Ray Shrewsberry • from Pixabay

प्रेम सिंह ने, अपनी बीरबल बुद्धि लगाकर, न्यायाधीश को, एक ग़लत फ़ैसला करने से, बचा लिया था जिसके लिए, अदालत में सभी तालियाँ बजाने लगते हैं| लड़का, न्यायाधीश के फ़ैसले से ख़ुश हो जाता है और अपनी नम आँखों से, प्रेम सिंह को धन्यवाद देते हुए, अपनी नई ज़िंदगी में प्रवेश कर जाता है|

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