गाँव वाला- Gaon ki Kahani

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गाँव वाला- Gaon ki Kahani for students

वातावरण के तौर पर, आज भी गाँव को शहर की अपेक्षा, अधिक स्वच्छ माना जाता है लेकिन, यदि बात बुद्धिमानी पर आ जाए तो लोग, गाँव वालों से ज़्यादा, शहर के लोगों को ही, बुद्धिमान समझते हैं जबकि, दुनिया को बुद्धिमानी का असली पैमाने पता ही नहीं| वह तो केवल, तकनीकी जानकारी रखने वालों को ही, अधिक बुद्धिमान समझ बैठते हैं| इसी भ्रम को मिटाने के लिए, गाँव वाला कहानी, मील का पत्थर साबित होगी| एक बहुत ही पिछड़ा गाँव था| यहाँ शिक्षा का स्तर बहुत कम था| सरकारी सुख सुविधाओं से, यह गाँव कई वर्षों से वंचित था| यहाँ के लोग, अपनी मूलभूत ज़रूरतों के लिए, कृषि पर ही आधारित रहते थे| कहा जाए तो, शहर के लोगों से, उनका कोई लेना देना ही नहीं था| इसी गाँव में, विक्रम नाम का लड़का था| उसके पिता गाँव के एक बड़े किसान थे| विक्रम को पढ़ाई का बहुत शौक़ था लेकिन, उसके गाँव में स्कूल की व्यवस्था नहीं थी| गाँव के बच्चों को ज़्यादातर, व्यवहारिक शिक्षा ही दी जाती थी| जहाँ उन्हें, पृथ्वी और उसमें रहने वाले जीव जन्तुओं के साथ, तालमेल बनाकर रहना ही सिखाया जाता था और इसके अलावा, छोटी मोटी चीज़ें, वह गाँव वालों को देखकर सीख जाते थे| एक दिन विक्रम, अपने पिता से शहर जाकर, पढ़ाई करने की इच्छा ज़ाहिर करता है| विक्रम के पिता को, उसकी यह माँग बड़ी अजीब लगती है क्योंकि, इस गाँव से आज तक, कोई भी पढ़ाई के लिए बाहर नहीं गया था| वह विक्रम को समझाते हैं हुए कहते हैं, “बेटा शहर के लोग, सुख पाने के लिए जीते हैं लेकिन, वह सब दुखी है क्योंकि, उनकी शिक्षा प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर रहना नहीं सिखाती बल्कि, प्रकृति का शोषण करना ज़रूर सिखाती है और हम, ऐसी शिक्षा इस गाँव में नहीं आने देना चाहते|” लेकिन विक्रम की ज़िद थी कि, “वह शहर जाकर ही पड़ेगा|” इस गाँव में, बच्चों के ऊपर ज़्यादा दबाव नहीं दिया जाता था इसलिए, उन्हें अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी| काफ़ी समझाने के बाद, जब विक्रम अपने पिता की बात नहीं मानता तो वह, मजबूरी में उसे शहर में पढ़ने की इजाज़त दे देते हैं| जिसके लिए वह, अनाज बेचकर पैसों का इंतज़ाम करते हैं ताकि, वह शहर में बिना किसी समस्या के रह सकें|

गाँव वाला
Image by lauren serota

विक्रम, शहर के एक बड़े स्कूल में दाख़िला लेता है लेकिन, पहले ही दिन से, उसे शहर के बच्चे, गाँव वाला कहकर संबोधित करते हैं हालाँकि, इस शब्द से, विक्रम को कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन, बच्चों का तरीक़ा, चिढ़ाने वाला था जिससे, विक्रम मन ही मन दुखी था| विक्रम यहाँ सिर्फ़ पढ़ने आया था लेकिन, यहाँ उसे पढ़ाई के अलावा, सब कुछ देखने को मिल रहा था| एक दिन, विक्रम अपनी कक्षा में अकेले बैठा था, बाहर से कुछ लड़कों ने, दरवाज़ा बंद कर दिया और वहाँ से, भाग गए| कई घंटों तक, विक्रम कमरे में अकेले ही बैठा रहा और जैसे ही, शिक्षकों ने कमरे का दरवाज़ा खोला, विक्रम को देखकर चौंक गए| उन्होंने उससे पूछा, “तुम्हें यहाँ किसने बंद किया था?” विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे यहाँ किसी ने बंद नहीं किया था बल्कि, मैं तो अपनी मर्ज़ी से यहाँ बैठा हूँ|” बच्चों को जैसे ही यह बात पता चलती हैं, उन्हें लगता है कि, विक्रम उनसे डर गया| स्कूल में धीरे धीरे बच्चों की शैतानियां बढ़ने लगी, उन्होंने विक्रम को, हर पल छेड़ना शुरू कर दिया| विक्रम को समझ में ही नहीं आ रहा था कि, शहरी बच्चे उसके साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहे थे? उसे लगने लगा था कि, “शायद गाँव वाला होना, शहर वालों की नज़र में कोई अपराध होगा|” विक्रम स्कूल के बच्चों से, दोस्ती करने की बहुत कोशिश करता है लेकिन, उससे कोई दोस्ती ही नहीं करना चाहता था| इसी तरह कई महीने बीत चुके थे| बच्चों के ऐसे बर्ताव की वजह से, विक्रम का पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा था| एक दिन स्कूल की तरफ़ से, सभी बच्चों को पिकनिक ले जाया जाता है| बच्चे स्कूल बस में बैठकर, एक पहाड़ी के पास, पिकनिक के लिए पहुँचते हैं| पहाड़ के चारों तरफ़, हरियाली दिखाई दे रही थी| जिसे देखकर, बच्चे ख़ुशी से उछलने लगते हैं| वह एक एक करके, बस से उतरकर, पहाड़ के ऊपर धमा चौकड़ी मचाना शुरू कर देते हैं| बच्चे मस्ती करने में लगे हुए थे कि, अचानक एक जंगली कुत्ता, उनके पिकनिक कैंप के अंदर घुस जाता है|

Gaon ki Kahani
Image by Creator: Dave Cameron

जंगली कुत्तें को देखते ही, बच्चे डर से चिल्लाने लगते हैं| बच्चों में अफ़रातफ़री मच जाती है| जंगली कुत्ते से भिड़ने की हिम्मत तो, शिक्षकों में भी नहीं थी| वह भी, अपनी जान बचाकर छुप जाते हैं| जंगली कुत्ता, बच्चों को नुक़सान पहुँचा पाता, उससे पहले ही, विक्रम कुत्ते को अपने पास बुलाकर बैठा लेता है| सभी यह देखकर दंग रह जाते हैं| बच्चों को समझ में ही नहीं आता कि, “इतने ख़तरनाक जंगली कुत्ते को, इस गाँव के साधारण से लड़के ने, कैसे क़ाबू में कर लिया?” सभी डरे सहमे से, विक्रम की तरफ़ देख रहे थे और विक्रम कुत्ते से, खेलने में मसरूफ़ हो चुका था| तभी, एक शिक्षक विक्रम को आवाज़ देकर कहते हैं, “विक्रम तुम उस कुत्ते को, दूर जाने को कहो| सभी बच्चों को इससे डर लग रहा है|” विक्रम उनसे कहता है कि, “इसे भूख लगी है, जब तक इसे कुछ खाने को नहीं मिलेगा| वह यहाँ से नहीं जाएगा|” तभी शिक्षक, खाने की थैली विक्रम के पास फेंकते हैं| विक्रम थैली खोलकर, कुत्ते को अपने हाथों से खाना खिलाने लगता है| यह देखकर सभी की आंखें फटी रह जाती है| अचानक खाना खाते ही, कुत्ता वहाँ से भाग जाता है| कुत्ते के भागते ही, सभी अपना सामान समेटकर, वापस बस में आकर बैठ जाते हैं क्योंकि, उन्हें डर लगने लगा था कि, कुत्ते के अलावा और कोई जानवर भी, यहाँ आ सकते हैं इसलिए, यहाँ से चलना ही ठीक रहेगा| सभी बच्चे, विक्रम को अपना हीरो समझने लगे थे| जैसे ही, इस घटना का पता स्कूल प्रबंधन को चला| उन्होंने विक्रम को सार्वजनिक तौर पर सम्मानित किया| विक्रम से पूछा गया कि, “तुम्हें जंगली कुत्ते से डर क्यों नहीं लगा?” विक्रम ने मुस्कुराते हुए कहा, “इस प्रकृति के सभी जीव जन्तु, हमारे अपने हैं लेकिन, यदि हम उन्हें डर कर देखेंगे तो, वह भी हमें अपना दुश्मन समझकर, हम पर हमला करेंगे इसलिए, मेरे गाँव का एक रिवाज़ है कि, प्रकृति के किसी भी प्राणी को, हम नुक़सान नहीं पहुँचाते और न ही उनसे, लड़ने का प्रयास करते| हम कोशिश करते हैं कि, हम अपनी वजह से, उन्हें कोई नुक़सान न पहुँचाए और इसी लिए, मेरे अंदर जंगली कुत्ते के प्रति, प्रेम की भावना थी और शायद इसलिए, उसने मुझे नुक़सान नहीं पहुंचाया| विक्रम की बात सुनकर, शिक्षकों को प्रकृति प्रेम की ताक़त का एहसास हो चुका था और इसी के साथ, सभी बच्चे विक्रम को पहली बार, उसके नाम से बुलाते हुए कहते हैं, “विक्रम हमारा हीरो है” और कहानी ख़त्म हो जाती है|

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