चमगादड़ का बच्चा – bedtime stories

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चमगादड़ का बच्चा – bedtime stories for kids:

चमगादड़ों को रात में जागने के लिए जाना जाता है| चमगादड़ के इसी गुण को आधार बनाकर, यह कहानी लिखी गई है| एक जंगल में कुएँ के अंदर बहुत से चमगादड़ रहते थे| चमगादड़ रात होते ही, कुएँ से बाहर निकलकर अपने खाने का इंतज़ाम किया करते और दिन होते ही, जंगल में वापस आकर कुएँ के अंधेरे में, उल्टा लटक कर सो जाते| एक बार सारे चमगादड़ दिन के उजाले में, कुएँ के अंदर उल्टा लटके हुए सो रहे थे| अचानक, आसमान में काली घटाएँ छा जाती है| जिसकी वजह से, जंगल में चारों तरफ़ अंधेरा हो जाता है| इसी बीच चमगादड़ का बच्चा जाग जाता है और वह अंधेरा देखते ही, कुएँ से बाहर निकल कर उड़ने लगता है| तभी उसकी नज़र, एक चिड़िया के घोंसले पर पड़ती है| घोंसले के अंदर चिड़िया के तीन बच्चे खेल रहे थे|

चमगादड़ का बच्चा kids story
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उन्हें देखकर चमगादड़ का भी मन मचल जाता है और वह तुरंत, चिड़िया के बच्चों के पास पहुँच जाता है| चमगादड़ को अपने पास देखते ही, सभी बच्चे डर जाते है लेकिन, चमगादड़ कहता है, “मुझसे डरने की ज़रूरत नहीं| मैं तो बस, तुम्हारे साथ खेलने आया हूँ|” चिड़िया के बच्चे बहुत मासूम थे| वह चमगादड़ पर भरोसा करके, उसके साथ खेलने लगते हैं हालाँकि, यह चमगादड़ भी बच्चा होने के कारण, चिड़िया के ही आकार का था| चिड़िया के बच्चे, चमगादड़ के साथ घुल मिल जाते हैं| कुछ ही देर में, आसमान से बादल साफ हो जाते हैं जिससे, आसमान में रोशनी तेज हो जाती है| चमगादड़ के बच्चे को, उजाला होते ही, मजबूरी में कुएँ के अंदर वापस आना पड़ता है| चमगादड़ को, चिड़िया के बच्चों की दोस्ती भा गई थी| चमगादड़ रोज़ रात होते ही, चिड़िया के बच्चों के साथ खेलने का मन बना लेता लेकिन, वह रात को सो रहे होते और जैसे ही उजाला होता, चमगादड़ को मजबूरी में, कुएँ के अंदर आना पड़ता|

bedtime stories for kids
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चमगादड़ को यह समझ में ही नहीं आ रहा था कि, “चिड़िया के बच्चे रात में हमेशा सोते क्यों रहते हैं?” चूंकि, चमगादड़ ने अंधेरे में ही अपनी दुनिया देखी थी इसलिए, उसे लगता था कि, “चिड़िया के बच्चे भी, अंधेरे में ही जागते होंगे|” कुछ दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा लेकिन, जब चमगादड़ का बच्चा, परेशान हो गया तो, उसने अपनी माँ से कहा, “मैं जब भी बाहर जाता हूँ| मेरे दोस्त, मेरे साथ खेल नहीं पाते| पता नहीं, अक्सर वह अपने घोंसले में सोते ही दिखाई देते हैं| चमगादड़ की माँ को, जैसे ही पता चलता है कि, उसके बेटे की दोस्ती, चिड़िया के बच्चों से हैं| वह अपने बेटे को समझाते हुए कहती है, “बेटा तुम्हारी परिस्थितियों के हिसाब से, कोई और कैसे बदलेगा? अगर तुम्हें दोस्ती ही करनी है तो, अपने लक्ष्यों की ओर, ले जाने वाले से करो क्योंकि, वही तुम्हारी परिस्थितियों को समझ सकेगा और तुमसे, सच्चा रिश्ता निभा पाएगा| अपनी माँ की बात सुनते ही, चमगादड़ ज़िंदगी की अनूठी सच्चाई समझ चुका था और उसने अपनी ही तरह अंधेरे में उड़ने वाले, कुछ उल्लुओं को अपना हमसफ़र चुन लिया था| चमगादड़ अपनी माँ की दी हुई शिक्षा की वजह से, अपनी परिस्थिति के अनुसार दोस्त बनाना सीख गया था|

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