चिड़िया का घोंसला (chidiya ki kahani)

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चिड़िया का घोंसला – chidiya ki kahani (Educational story in hindi)

असलम और राहुल बचपन के पक्के दोस्त थे| दोनों शहर के किनारे एक छोटे से गाँव में रहते थे| राहुल बचपन से ही पढ़ने लिखने का शौक़ीन था, लेकिन असलम को पशु पक्षियों में ज़्यादा रुचि थी| असलम के कारण राहुल भी पालतू जानवरों के पीछे घूमता रहता था| एक दिन असलम अपने खेत के पास एक छोटे से पेड़ के ऊपर चढ़ जाता है| उसे पेड़ की शाखाओं के ऊपर, एक चिड़िया का घोंसला दिखाई देता है, जिसमें दो अंडे रखे होते हैं| असलम चिड़िया के घोंसले को देखकर ख़ुश हो जाता है और राहुल को भी पेड़ के ऊपर आने को कहता है| अब राहुल भी चिड़िया का घोंसला देखना चाहता था, इसलिए वह असलम का हाथ पकड़कर, ऊपर चढ़ जाता है| तभी असलम चिड़िया का एक अंडा, अपने हाथों में उठा लेता है| राहुल असलम को ऐसा करने से मना करता है, लेकिन असलम राहुल से कहता है, “अरे कोई बात नहीं| मैं संभाल के उठा रहा हूँ| इसे कोई नुक़सान नहीं होगा”|

चिड़िया का घोंसला
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तभी अचानक एक चिड़िया पेड़ की तरफ़ तेज़ी से आती है| वह असलम के हाथ में अंडा देख, दूसरे पेड़ में जाकर बैठ जाती है और जोड़ जोड़ से आवाज़ करने लगती है| असलम पक्षियों की भावनाओं को समझता था, इसलिए वह चिड़िया की आवाज़ सुनकर, समझ जाता है, कि यही इन अंडों की माँ हैं| वह जल्दी से चिड़िया का अंडा, घोंसले में वापस रख देता है और राहुल को पेड़ के नीचे उतरने को कहता है| राहुल घबरा जाता है और अचानक पेड़ से छलांग लगा देता है, जिससे उसे थोड़ा मोच आ जाती है| असलम नीचे उतरकर राहुल को उठाता है और दोनों धीरे धीरे घर वापस आ जाते हैं| अगले ही दिन असलम को पता चलता है, कि गाँव में पक्की सड़क बनने जा रही है, जिसके लिए सड़क के किनारे वृक्षों को काटा जाएगा| असलम भागते हुए राहुल के पास पहुँचता है और उससे कहता है कि, “इस गाँव में कुछ लोग पेड़ काटने जा रहे हैं| कही वह घोसले वाला पेड़ ही न काट दें| चलो हमें चिड़िया के घोंसले को बचाना होगा| नहीं तो चिड़िया के बच्चे मर जाएंगे”। राहुल असलम के साथ खेत की ओर भागता है, लेकिन जैसे ही दोनों वहाँ पहुँचते हैं, तब तक वह पेड़ कट चुका था| कटे हुए पेड़ को देखकर, असलम और राहुल दुखी हो जाते हैं, अचानक राहुल की नज़र ज़मीन पर पड़े हुए घोसले पर जाती है| वह भागकर घोंसले के पास पहुँचता है तो देखता है, कि वह दोनों अंडे उसी घोसले में फँसे हुए थे|

chidiya ki kahani
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राहुल असलम को आवाज़ लगाता है और कहता है, “देखो दोनों अंडे अभी तक सुरक्षित हैं| हम इन्हें किसी दूसरे पेड़ पर रख देते हैं” लेकिन असलम इस बात से चिंतित होता हैं, कि अगर लोगों ने वह पेड़ भी काट दिया तो, इनका क्या होगा। असलम राहुल से कहता है, “चलो पहले हमें इन पेड़ काटने वालों से बात करनी होगी, ताकि हमें पता चल सके कि, यह और कितनी तबाही मचाने वाले हैं|” वे दोनों सड़क पर काम कर रहे, एक व्यक्ति के पास पहुँचते हैं| दोनों छोटे बच्चे थे लेकिन दोनों की बातों में बहुत बड़ी गहराई थी| वह व्यक्ति रोड सर्वेक्षण अधिकारी था| बच्चों की बात सुनकर, अधिकारी सोच में पड़ जाता है, क्योंकि उसे आने वाले समय में पक्षियों की हालत पर चिंता होने लगी थी| अधिकारी को कहीं न कहीं पहले से ही, पर्यावरण को लेकर चिंता थी, इसलिए वह बच्चों के हाथ चिड़िया का घोंसला रखे हुए, सड़क निर्माण में, पेड़ों का बैकग्राउंड बनाकर, एक फ़ोटो पर्यावरण जागरूक पोस्ट के साथ, सोशल मीडिया पर शेयर कर देता है और देखते ही देखते पोस्ट वायरल हो जाती है| कुछ ही घंटों में सड़क बनाने के लिए, वृक्षों की कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है| राहुल और असलम यह बात जानकर ख़ुशी से उछल पड़ते हैं| नए फ़ैसले के अनुसार, वृक्षों को सुरक्षित रखते हुए ही सड़क निर्माण किया जाएगा| सरकार का यह फ़ैसला पक्षियों के लिए जीवन दायक बन जाता है| असलम और राहुल चिड़िया के घोंसले को एक बहुत बड़े विशाल पेड़ के ऊपर रखवा देते हैं और कुछ ही दिनों के बाद, दोनों बच्चे अंडे से बाहर निकल आते हैं और अपनी माँ के साथ, हरे हरे पेड़ों के ऊपर, आसमान की ऊंचाइयों में, अपनी ज़िंदगी की उड़ान भरने लगते हैं, जिन्हें देखकर राहुल और असलम बहुत ख़ुश होते हैं|

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