तनचला – रोचक कहानी इन हिंदी

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तनचला – रोचक कहानी इन हिंदी (Interesting story):

मन से चलने वाले को, मनचला कहते हैं और वहीं जो व्यक्ति, अपने शरीर के आधार पर चलता है, उसे तनचला कहते हैं| ऐसे ही यह कहानी, एक तनचले लड़के की है जो, अपने खाने की वजह से, इतना मोटा हो चुका था कि, उसे चलने के लिए सहारे की ज़रूरत पड़ती थी| राहुल को बचपन से ही, खाने पीने का बहुत शौक़ था| आज उसका 10वाँ जन्मदिन है इसलिए, उसके पिता ने एक छोटी सी पार्टी रखी थी| पार्टी में मोहल्ले के, सभी बच्चों को बुलाया गया था लेकिन, राहुल ने केक काटते ही, सारा केक ख़ुद ही खा लिया जिससे, उसके पिता, उसे डांटने लगे लेकिन, राहुल की माँ ने, अपने बेटे का पक्ष लेते हुए कहा कि, “वह तो बच्चा है, फिर भी आप उसे डांट रहे हो और वैसे भी, उसका आज जन्मदिन है| केक ही तो खाया है| इसमें इतना नाराज़ होने वाली कौन सी बात है| लेकिन, राहुल के पिता उसके मोटापे से परेशान थे| उन्हें अच्छे से पता था कि, राहुल की खाने की आदत ही, उसके ऐसे हालात की, ज़िम्मेदार है लेकिन, राहुल अपने खाने में पाबंदी, नहीं लगा पा रहा था जिससे, दिनोंदिन उसका वजन, बढ़ने लगता है और उसकी हालत, ख़राब होने लगती है लेकिन, इसके बावजूद भी, राहुल का ध्यान सिर्फ़ खाने में ही रहता था|

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कई बार तो भूख के कारण, राहुल किचन में रखी हुई, कच्ची सब्ज़ियां ही खा जाता था| राहुल के अतिरिक्त खाने की आदत छुड़ाने के लिए, उसके पिता ने कई तरकीबें सोची| यहाँ तक कि, उसे इतनी सी उम्र में, एक्सरसाइज करने के लिए, जिम तक भेजा लेकिन, राहुल जिम में जाकर भी, आराम से बैठकर खाने लगता था| एक दिन राहुल के पापा, अख़बार पढ़ रहे थे अचानक, उन्हें एक पन्ने पर, मोटापे की समस्या से संबंधित, एक आयुर्वेदिक केंद्र का विज्ञापन, छपा दिखाई देता है जिसमें, इसी शहर का पता दिया हुआ था| वह उसी दिन, अपने बेटे को लेकर, आयुर्वेदिक केंद्र पहुँच जाते हैं| वहाँ उन्हें बताया जाता है कि, उनके बेटे को कई तरह की, आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन करना होगा| तभी वह अपनी वास्तविक स्थिति में आ सकेगा| लेकिन, राहुल तो केवल ऐसी चीज़ें खाना पसंद करता था जिससे, उसकी भूख मिटे| वह भला, इन औषधियों को कैसे खाता? उन्हें यहाँ आकर भी, निराशा ही हाथ लगती है क्योंकि, एक बच्चे को उसकी इच्छा के बिना, कुछ खिला पाना बहुत मुश्किल होता है| वह आयुर्वेदिक केंद्र से भी, निराश होकर वापस लौटने लगते हैं लेकिन, रास्ते में उनकी मुलाक़ात, एक फ़ौजी से होती है| वह फ़ौजी, अपनी नौकरी की पहली छुट्टी में, अपने घर जा रहा था| राहुल उस वक़्त भी, खाने में ही लगा हुआ था| उसे खाते देख फ़ौजी ने कहा, “आपके बेटे को एक्सरसाइज करना चाहिए| नहीं तो, इसकी हालत और ख़राब हो जाएगी| आप इसके खाने में, कोई पाबंदी नहीं लगा पा रहे हैं| शायद इसलिए, इसका वज़न बढ़ रहा है| फ़ौजी की बात सुनते ही, राहुल के पिता कहते हैं कि, “मैंने कई कोशिशें, करके देख लीं लेकिन, कहीं से कोई लाभ नहीं हो रहा है| मेरे बेटे की हालत बिगड़ती जा रही है|” तभी फ़ौजी कहता हैं, “आपका बेटा तो, मुझसे भी पतला है|” राहुल के पिता को, यह बात अजीब लगती है क्योंकि, फ़ौजी तो एकदम तंदुरुस्त लग रहा था|

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वह, फ़ौजी से तुरंत पूछते हैं कि, “आप बचपन में, मेरे बेटे की तरह ही थे, क्या?” तभी फ़ौजी, मुस्कराते हुए कहता है, “नहीं मैं तो, इससे भी ज़्यादा मोटा था|” यह बात सुनते ही, राहुल के पापा का आत्मविश्वास बढ़ जाता है| उन्हें लगता है कि, “शायद यह कोई डॉक्टर का पता बता देंगे जिससे, उन्हें उनकी समस्या का समाधान मिल जाएगा” लेकिन फ़ौजी का जवाब तो, कुछ अलग ही था| उन्होंने कहा, “आपका बेटा तनचला है और इसलिए, वह अपने पेट की भूख के अनुसार चलता है| जब तक आप, इसके जीवन को सही दिशा नहीं देंगे, वह अपने शरीर के हिसाब से ही, जीता रहेगा क्योंकि, बचपन से ही, बच्चों को खाने पीने और खेलने में, ख़ुशी मिलती है लेकिन, हर चीज़ की, अपनी एक सीमा होनी चाहिए| राहुल के पिता, फ़ौजी की बात को बड़ी गहराई से समझ रहे थे| तभी, फ़ौजी ने अपनी ज़िंदगी का उदाहरण लेते हुए कहा कि, “मैं बचपन में बहुत मोटा था लेकिन, मुझे बंदूक के खिलौने, बहुत पसंद थे इसलिए, मेरे पिता ने मेरे मन में, फ़ौज में जाने की बात डाल दी ताकि, मुझे असली बंदूक मिल सके इसलिए मैं, बचपन से ही फ़ौजी बनने के लिए, कड़ी मेहनत करने लगा और कुछ ही महीनो में, मेरा वज़न कम होने लगा जिससे, मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और उसके बाद मैंने कभी, पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज, आपके सामने हूँ| राहुल के पिता को, फ़ौजी की बात समझ में आ चुकी थी| उन्होंने तय किया कि, वह अपने बेटे को ऐसी शिक्षा देंगे जिसमें, वह ज़िंदगी में कुछ ऊँचे काम करने के लिए प्रेरित हो सके| उन्हें अपने बेटे के मोटापे की समस्या का समाधान, नज़र आ चुका था और अब वह तैयार थे, राहुल की ज़िंदगी में एक बड़ा बदलाव लाने के लिए|

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