त्योहार (Tyohar) – Meaning of festival

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त्योहार (Tyohar) – Meaning of festival (hindi story)

हमारे जीवन में, त्योहारों का बहुत ऊँचा स्थान है क्योंकि, त्योहार खुशियों का प्रतीक होते हैं और खुशियां, सभी के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती हैं| त्योहारों से प्रेरित, एक ज़बरदस्त मोटिवेशनल कहानी आपको आनंदित कर देगी| एक दिन राहुल, अपने कॉलेज के हॉस्टल की छत पर, अकेले उदास बैठा था| तभी, उसके दोस्त, उसके पास आते हैं और उसकी उदासी का कारण पूछते हैं लेकिन, वह बनावटी हँसी के साथ, उन्हें कहता है कि, “कोई बात नहीं यार, बस ऐसे ही|” तभी, जैनी उससे कहती है, “राहुल तुम हमारे ग्रुप के, सबसे ज़्यादा ख़ुश रहने वाले लड़के हो, क्या हम नहीं जानते? ज़्यादा बनने की कोशिश मत करो| जल्दी बताओ, बात क्या है? तुम मुँह लटका के क्यों बैठे हुए हो? हम सब बोर हो रहे हैं| तुम्हें पता है न कि, इतना बड़ा त्योहार आ रहा है, जिसके लिए हमें मार्केट भी जाना है? तुम भूल गए हम सब ने तय किया था कि, हम इस त्योहार में कहीं बाहर, पिकनिक पर चलेंगे|” इसी बीच, रॉकी जो की ग्रुप में सबसे बड़ा था, वह राहुल को हंसाने की कोशिश करता है| राहुल उसे रोकते हुए कहता है कि, “यार इस बार मेरे घर से मेरे पापा ने, कोई पैसे नहीं भेजे हैं क्योंकि, उनकी सैलरी मिलने में देरी हो रही है| मुझे इस त्योहार में कुछ चीज़ें ख़रीदनी थी, इसलिए सोच रहा हूँ कि, अब पैसों का इंतज़ाम कैसे करूँ|” उसकी यह बात सुनते ही, सभी दोस्त उसे ग़ुस्से से चिल्लाने लगते हैं और कहते हैं, “इतनी सी बात के लिए, तू मुँह फुलाकर बैठा है| हम से कह दिया होता, हम सब तेरे लिए क्या इतना नहीं कर सकते?” राहुल स्वाभिमानी लड़का था, इसलिए किसी की मदद लेने से ज़्यादा, मदद करने में यक़ीन रखता था लेकिन, सभी दोस्तों के ज़िद करने के बाद, राहुल उनसे पैसे ले लेता है और सभी के साथ, बाज़ार के लिए, निकल जाता है|

tyohar - festival story
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बाज़ार में सभी दोस्त, आने वाले त्योहार के लिए, अपने अपने पसंद की चीज़ें ख़रीदते हैं और लौटते वक़्त, मूवी देखने चले जाते हैं हालाँकि, उन्हें हॉस्टल वापस लौटने में, थोड़ा देर हो जाती है लेकिन, उनके हॉस्टल में, किसी तरह की कोई बंदिश नहीं थी| यहाँ सभी विद्यार्थियों को, घूमने फिरने की पूरी आज़ादी थी| अगली सुबह सभी दोस्त, पिकनिक के लिए निकलने वाले थे, जिसके लिए सभी ने अपनी अपनी मोटरसाइकल से जाना ही बेहतर समझा था| उन्होंने पिकनिक के लिए शहर से दूर, एक पहाड़ी इलाक़े में जाना तय किया था| वक़्त के अनुसार सभी, पिकनिक के लिए, निकल जाते हैं और लगभग तीन घंटों की यात्रा के बाद, सभी पहाड़ी इलाक़े के नज़दीक आ जाते हैं| चारों तरफ़ ख़ूबसूरत हरियाली की काया, फैली होती है| पक्षी हवाओं में, गीत गुनगुना होते है| सभी ने, पहली बार ऐसा नज़ारा देखा था| जैनी अपने दोस्तों से कहती है कि, “क्या हम घर बनाकर, हमेशा के लिए यहाँ रह सकते हैं?” जैनी के दोस्त, उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहते हैं कि, “हाँ क्यों नहीं, तुम अपने पति के साथ शादी के बाद यहाँ आकर रह लेना|” जैनी शर्माते हुए, अपने दोस्तों को चुप करवाती है| सभी मिलकर, अपने रहने के लिए टेंट लगाकर, खाने बनाने के लिए, आग जला लेते हैं| वह अपने साथ, म्यूज़िक के लिए, साउंड बॉक्स भी लेकर आए थे, जिसमें तेज़ी से गाने बजाते हुए, सभी पहाड़ के ऊपर ही, नाचने लगते हैं| सभी दोस्त खाना बना रहे होते हैं कि, उसी समय राहुल की नज़र, दूर एक गाँव पर पड़ती है| जहाँ से स्थानीय संगीत की आवाज़ आ रही थी| राहुल अपने दोस्तों से, साउंड बॉक्स बंद करने के लिए कहता है और ग़ौर से सुनने के बाद, उसे लगा कि, उस गाँव में, कोई त्योहार मनाया जा रहा है| सारे दोस्तों की ख़ुशी, दो गुना हो जाती है| रॉकी उत्साहित होकर कहता है कि, यारों हम तो यहाँ अपना त्योहार मनाने आए थे, लेकिन सोने पर सुहागा हो गया| चलो इसी गाँव में चलकर, ख़ुशियों का आनंद उठाते हैं| सभी टैंट में अपना सामान रख के, पैदल ही पहाड़ी के नीचे उतर आते हैं और गाँव के अंदर प्रवेश कर जाते हैं| इस गाँव में पहुँचते ही, सभी को एक जगह, बहुत से लोगों की भीड़ लगी हुई दिखाई देती है| जहाँ कोई प्रतियोगिता हो रही थी|

त्योहार (festival) story in hindi
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जैनी राहुल से कहती है कि, “शायद यह कोई कॉम्पटीशन है| चलो चलकर पूछते हैं|” राहुल वहाँ खड़े, कुछ व्यक्तियों से, इस कॉम्पटीशन के बारे में पूछता है| गाँव के सभी लोग, शहर के लड़के लड़कियों को देख, रुक जाते हैं और उनसे पूछते हैं कि, “तुम कहाँ से आए हो?” तभी जैनी यहाँ पर आने की वजह बताती है| सभी दोस्त यह जानना चाहते थे कि, गाँव को इतनी ख़ूबसूरती से क्यों सजाया गया है और यहाँ किस त्योहार का जश्न मनाया जा रहा है? उनकी जिज्ञासा देख, एक बुजुर्ग व्यक्ति, उन्हें बताता है कि, “हमारे गाँव में हर दिन, इसी तरह का त्योहार मनाया जाता है क्योंकि, हमने संकल्प किया है कि, हम किसी भी तरह की कमज़ोरी और दुख इस गाँव में नहीं आने देंगे, इसलिए यदि कोई भी व्यक्ति, किसी भी तरह के बुराई में फँसता है तो, हम सब उसे प्रोत्साहित करके, बाहर लाते हैं और उसकी योग्यता को निखारते हुए, उसे एक बेहतरीन इंसान बनाते हैं ताकि, वह अपने जीवन के वास्तविक महत्व को समझते हुए, प्रकृति के हित में, कार्य करें और यही, हमारी परंपरा है|” सभी दोस्तों को यह बात बड़ी अजीब लगती है| वह पूछते हैं कि, “फिर आज का त्योहार क्यों मनाया जा रहा है?” तभी उन्होंने कहा, “आप उन तीनों लोगों को देख रहे हो| उसमें से एक व्यक्ति, कुछ दिन पहले, पेड़ के ऊपर से गिर गया था जो, चल नहीं पा रहा था और आज वह, अपने कठिन परिश्रम की वजह से, चलने लगा| दूसरा व्यक्ति जो, अपने पुत्र की मृत्यु की वजह से, बहुत दुखी था लेकिन, आज वह एक बात मान गया कि, इस प्रकृति में, सभी को मरना है तो, कोई पहले गया, या बाद में, क्या फ़र्क पड़ता है? और आज वह, अपनी बेटे की विदाई पर, कोई दुखी नहीं है और तीसरे व्यक्ति को, हमने कुछ महीनों पहले, काम से शहर भेजा था लेकिन, यह वहाँ से, नशे की लत लगवा के चला आया| जैसे ही, हम लोगों को यह बात पता चली, हमने इसे उस बुराई से बाहर आने के लिए, प्रोत्साहित किया और आज यह, एक महीने के बाद बाहर आने में सफल हुआ| इसका परीक्षण करने के लिए, कल रात इसके सामने हमने, कई तरह की मदिरा रखी थी और इसे, कमरे में अकेले, रात भर के लिए बंद कर दिया था लेकिन, इसने मदिरा को हाथ भी नहीं लगाया| इसने अपनी इंद्रियों पर क़ाबू पा लिया था और इसीलिए, आज इन तीनों लिए, त्योहार है जिसे, हम गाँव वाले जश्न की तरह मना रहे हैं| हमारे पूर्वजों का मानना था कि, “त्योहार बाहर का नहीं बल्कि, अपने अंदर का होना चाहिए” अगर तुम अपने अतीत की कमजोरियों को हराकर, मज़बूती की ओर बढ़ो, तो ये तुम्हारा त्योहार होगा और यही, इस गाँव के त्योहार मनाने की परंपरा है|” सभी दोस्तों को असली त्योहार का मतलब समझ में आ चुका था और वे जीवन के असली महत्व को समझ चुके थे और इस अद्भुत रहस्य को जानकर सभी दोस्त वापस आ जाते हैं|

अनुभव (Anubhav) – Prem Kahani
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बाज़ार में सभी दोस्त, आने वाले त्योहार के लिए, अपने अपने पसंद की चीज़ें ख़रीदते हैं और लौटते वक़्त, मूवी देखने चले जाते हैं हालाँकि, उन्हें हॉस्टल वापस लौटने में, थोड़ा देर हो जाती है लेकिन, उनके हॉस्टल में, किसी तरह की कोई बंदिश नहीं थी|

 

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