परेशान – Motivation kahani

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परेशान (pareshan) – Motivation kahani in hindi

आज के यूथ की सबसे बड़ी परेशानी, उसके भविष्य को लेकर होती है| अच्छी शिक्षा होने के बावजूद, आज का युवा परेशान हैं| कुछ घटनाओं से प्रेरित होकर यह कहानी लिखी गई है जो कि, युवाओं के लिए मददगार होगी| कॉलेज की पढ़ाई पूरी होते ही, सुनील नौकरी की तलाश में परेशान रहने लगता है हालाँकि, अपने विद्यार्थी जीवन में सुनील एक औसत विद्यार्थी था| उसे कोई बड़ी नौकरी की लालच तो नहीं थी लेकिन, वह इतनी आकांक्षा ज़रूर रखता था कि, अपना घर चलाने में वह सक्षम हो सकें और इसी कशमकश में, सुनील परेशान रहने लगा| उसने कई साक्षात्कार दिए, लेकिन उसका चयन कहीं नहीं हुआ| उसे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था| जहाँ जाता उसे निराशा ही हाथ लगती| एक दिन परेशान होकर सुनील निर्णय करता है कि, वह ख़ुद का काम करेगा, इसलिए वह अपने कॉलेज के ही बाहर चाय और समोसे की दुकान लगाने लगता है| कुछ ही दिनों में सुनील की हालत अच्छी होने लगती है| उसकी आमदनी उसकी इच्छानुसार हो जाती थी| सुनील, जितने भी पैसा कमाता, ज़्यादातर अपने गाँव भेज देता था| गाँव में सुनील के माता पिता रहते थे, जिनकी हालत दयनीय थी, लेकिन सुनील की वजह से, उन्हें काफ़ी सहायता मिलने लगी थी| सुनील अपने काम में पूरी ईमानदारी से लगा रहता था| एक दिन सुनील चाय बना रहा था, अचानक उसकी दुकान पर एक वैज्ञानिक आते हैं जोकि, उसी के कॉलेज में लेक्चर देने वाले थे|

परेशान
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वह सुनील के बारे में कुछ नहीं जानते थे, लेकिन जैसे ही कुछ लड़कों के मुँह से, उन्होंने सुना कि सुनील इसी कॉलेज का विद्यार्थी था जोकि, परेशानी की वजह से, चाय नास्ते की दुकान चला रहा है| ये बात सुनते ही, वैज्ञानिक की आँखों में आँसू आ जाते हैं और उन्हें एहसास होता है कि, आज भी शिक्षा को लेकर लेकर युवाओं में कितना भ्रम फैला हुआ है| युवा शिक्षा को केवल रोज़गार की दृष्टि से ही देखते हैं| वह तुरंत सुनील को कहते हैं कि, “मैं तुमसे कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ| क्या तुम्हारे पास समय हैं?” सुनील को यह बात पता नहीं थी कि, यह कोई वैज्ञानिक हैं| सुनील उन्हें साधारण व्यक्ति समझ रहा था| सुनील उनके प्रश्नों के उत्तर के लिए तैयार हो जाता है| वैज्ञानिक ने सबसे पहला सवाल पूछा, “क्या तुम्हें यह काम अच्छा लगता है?” सुनील ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “जी हाँ,मुझे यह काम अच्छा लगता है, क्योंकि मुझे इस काम के पैसे मिलते हैं|” तभी वैज्ञानिक कहते हैं, “यदि तुम्हें बहुत सारे पैसे मिल जाए, तब भी तुम यही काम करना चाहोगे|” सुनील सोच में पड़ जाता है| वह हिचकते हुए कहता है कि, “अगर अच्छे पैसे मिल जाए तो, मैं ये क्यों करना चाहूंगा|” वैज्ञानिक सुनील के दिल की बात समझ जाता है| वह सुनील से कहता है कि, “ज़रा सोचो, जिस काम को तुम केवल पैसों के लिए कर रहे हो| वह तुम्हें एक कामयाबी तक कैसे ले जा सकेगा| कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, लेकिन जब आप काम पैसों को आधार बनाकर चुनते हो तो, वह काम ख़ुद बख़ुद छोटा हो जाता है| सुनील वैज्ञानिक की बातों को नज़रअंदाज़ कर, अपने काम में लग जाता है| दरअसल सुनील अपने जीवन की परेशानियों से इतना घिरा हुआ था कि, उसे अपने काम में चयन करने का मौक़ा ही नहीं मिला| उसे जो दिखा, उसने चुन लिया और अब उसी के सहारे, वह अपने जीवन को आगे बढ़ा रहा था, लेकिन इसका अंजाम तो बुरा ही होना था क्योंकि, यदि नशे में कोई यात्रा की जाए तो, उसके परिणाम भयावह हो सकते हैं, जिसका अंदाज़ा सुनील ने नहीं लगाया था| एक दिन सरकारी आदेश के अनुसार, कॉलेज के आस पास की सभी अनाधिकृत दुकानें, हटाने का फ़ैसला आता है, जिसका पता चलते ही सुनील की तो मानो, दुनिया हिल जाती है| उसने अपना काम अच्छा जमा लिया था और अब अचानक उसका रास्ता धुँधला दिखाई देने लगा था| सुनील का धंधा बंद हो चुका था और वह उसी मुहाने पर खड़ा हो गया था, जहाँ से उसने शुरुआत की थी| सुनील को उस वैज्ञानिक की बातें याद आने लगी| सुनील उनसे मिलना चाहता था, इसलिए वह उनके बारे में जानकारी इकट्ठी करता है| सुनील को पता चलता है कि, वह कई कॉलेजों में गेस्ट लेक्चर के लिए आते हैं और अगली बार वह, एक हफ़्ते बाद उसी कॉलेज में आने वाले थे, जहाँ से सुनील ने पढ़ाई की थी| यह बात पता चलते ही सुनील की आँखों में ख़ुशी की चमक आ जाती है| वह उनका बेसब्री से इंतज़ार करने लगता है| कुछ ही दिनों बाद, वह घड़ी आ जाती है, जब सुनील उनसे मिलने वाला था| सुनील के दिमाग़ में बहुत से प्रश्न उठ रहे थे| वह अपने परेशानियों का स्थायी उपचार चाहता था| सुनील किसी क़दर कॉलेज के अंदर प्रवेश कर जाता है और उनके लेक्चर ख़त्म होने का इंतज़ार करने लगता है, दरअसल सुनील उनसे निजी तौर पर मिलना चाहता था ताकि, वह उन्हें अपने जीवन की परेशानियाँ बता सके है और उसका हल उसे मिल जाए| सुनील काफ़ी देर से बाहर खड़ा होकर इंतज़ार कर रहा था, अचानक वैज्ञानिक कॉलेज के बाहर आते हुए दिखाई देते हैं| सुनील तुरंत उनके पास पहुँच जाता है और उनके सामने हाथ जोड़कर कहता है, “कृपया मुझे मेरी ज़िंदगी का सही रास्ता बताइए| मैं क्या करूँ कि, मैं अपना परिवार भी चला सकूँ और अपने जीवन में बिना रुके आगे बढ़ता रहूँ|” वैज्ञानिक सुनील को देखते ही पहचान जाते हैं| वह मुस्कराते हुए कहते हैं कि, “मुझे पता था, तुम मुझ तक ज़रूर पहुँचोगे क्योंकि, तुम्हारे अंदर ईमानदारी है और ईमानदार व्यक्ति ज़्यादा दिन तक, बिना किसी उद्देश्य के कार्य नहीं कर सकता| तुम्हें यदि अपने जीवन में एक निश्चित गति लानी है तो, स्वधर्म को पहचानना होगा, जिसके लिए तुम्हें अपने अतीत को नज़रअंदाज़ करते हुए, एक ऐसा लक्ष्य लेना होगा, जिस पर तुम्हारी पह्चान हावी न हो, लेकिन ध्यान रहे, तुम जो भी काम चुनो, उसमें तुम्हारे स्वार्थ नहीं होने चाहिए बल्कि, मैं तो ये कहूंगा कि, तुम्हारा काम किसी भी सामाजिक कार्य, जीव जन्तु या पेड़ पौधों के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्पित होना चाहिए, तभी तुम अपने वास्तविक जीवन के उद्देश्य को प्राप्त कर सकोगे क्योंकि, तुम सांसारिक जीव नहीं बल्कि, प्राकृतिक जीवन हो और तुम्हें प्रकृति से तालमेल बनाकर ही रखना होगा| यही मानव धर्म है और यही तुम्हें ऊँचाइयों तक लेकर जाएगा|

Motivation kahani
Image by Jesús Mompó from Pixabay

” सुनील को कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन वैज्ञानिक की बात से, उसे अपने जीवन का उद्देश्य पता चल चुका था| सुनील ने वैज्ञानिक से पलटकर पूछा, “क्या आप अपना कार्य बता सकते हैं ताकि, मुझे अपने लक्ष्य का अनुमान लगाने में आसानी हो|” वैज्ञानिक ने सुनील की बात का उत्तर देते हुए कहा, “मैं एक भूवैज्ञानिक हूँ| मैं अपनी खोज के माध्यम से, बहुत से किसानों की मदद करता हूँ ताकि, वह अपनी खेती उच्चतर तकनीक के साथ कर सकें और यही मेरी ख़ुशी का राज है|” सुनील वैज्ञानिक से हाथ जोड़कर विदा लेते हुए कहता है कि, आप ही मेरे मार्गदर्शक हैं और मैं पूरी कोशिश करूँगा कि, आपके बताए हुए मार्ग पर चल सकुं और इसी के साथ सुनील वैज्ञानिक से विदा ले लेता है|

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