राजा और रानी – Raja Rani ki kahani

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राजा और रानी – Raja Rani ki kahani in hindi

दुनिया के इतिहास में, राजा और रानी की, कई कहानियाँ (raja rani ki kahani ) मौजूद हैं जिनके, कोई वास्तविक प्रमाण तो नहीं है लेकिन, उन कहानियों से, जीवन की सीख ज़रूर मिलती है| ऐसी ही एक कहानी, विजयगढ़ की है| विजयगढ़ का राजा, अपनी रानी से बहुत प्यार करता था| वह अपनी रानी की, हर इच्छा पूरी करता| जिसका भुगतान, राज्य की जनता को करना पड़ता| रानी की, कभी न ख़त्म होने वाली इच्छाओं से, सारा राज्य परेशान था| रानी अक्सर, ऊल जुलूल माँगें करती और राजा, उन्हें पूरा करने के लिए, नागरिकों को परेशान करता| राजा ने रानी के मोह में, अपने राज्य पर ध्यान देना बंद कर दिया था| वह भूल चुका था कि, वह रानी का राजा होने से पहले, इस राज्य का रक्षक है और उसकी, पहली ज़िम्मेदारी, राज्य के नागरिकों की सुरक्षा करना है लेकिन, विजयगढ़ राज्य, “अंधेर नगरी चौपट राजा” की तर्ज़ पर चलने लगा था| एक दिन राजा को ख़बर मिलती है कि, उसके राज्य में, दक्षिण की तरफ़ से, दूसरी सेना आक्रमण करने वाली है| जिसके लिए उन्होंने, पहाड़ों के ऊपर, क़िले का निर्माण प्रारंभ कर दिया है लेकिन, राजा अपनी रानी के साथ, भोग विलास में डूबा हुआ था| वह इतनी बड़ी बात, नज़रअंदाज़ कर देता है और कुछ दिनों के लिए, रानी के साथ, अपने राज्य से दूर, भ्रमण के लिए निकल जाता है| राजा और रानी, एक दूसरे के प्रेम में, डूबे हुए हसीन मौसम का मज़ा ले रहे थे| उनके जीवन में ख़ुशी और रोमांच की कोई कमी न थी| कई दिनों की बाहरी यात्रा के बाद, जैसे ही राजा अपनी रानी के साथ, विजयगढ़ राज्य में दाख़िल होता है| उसके पैरों तले, ज़मीन खिसक जाती है क्योंकि, राज्य की सत्ता, बदल चुकी थी| अब विजयगढ़ के सैनिकों ने, राजा के आदेश का पालन करना बंद कर दिया था और उसकी जगह, दक्षिण से नया राजा आ चुका था|

Raja Rani ki kahani
Image by ha11ok from Pixabay

राजा, अपने पुराने सलाहकारों के पास, गुप्त रास्ते से पहुँचता है| वहाँ जाकर, वह अपने राज्य के पुरोहित से, सत्ता परिवर्तन का कारण जानना चाहता है| राज्य के पुरोहित, राजा को बताते हैं कि, “आपकी जनता, आपसे बहुत परेशान थी, जिसके लिए, मंत्रियों ने कई बार आपको, चेताया था लेकिन, आप महारानी के साथ, निजी वार्ता में लिप्त थे| विजयगढ़ की जनता, कई बार आपसे मदद के लिए, गुहार लगाने आयी लेकिन, आपने उनकी, एक न सुनी| वहीं साउथ के राजा ने, यहाँ की जनता के लिए, कई तरह की, लाभान्वित करने योग्य योजनाएं बनायी हैं| जिसके कारण, विजयगढ़ की जनता, साउथ के राजा का साथ देने के लिए, तैयार हो गयी है| राजा और रानी पहली बार, अपने सलाहकारों की बात, बड़ी गंभीरता से सुन रहे थे लेकिन, अब बहुत देर हो चुकी थी| राजा, अपने सलाहकारों को, आदेश देता है कि, हमें दक्षिण के राजा से, युद्ध करना होगा और अपना राज्य वापस लेना होगा| इसके लिए, सारे सैनिकों को इकट्ठा करो| लेकिन सलाहकार, राजा से कहता है कि, “आपके साथ अब कोई भी सैनिक, आने को तैयार नहीं|” सैनिकों का कहना है कि, “आपने कभी भी, उन्हें अपना माना ही नहीं| आप हमेशा, अपने निजी जीवन में ही संलिप्त थे तो, आपको अब, सैनिकों की याद क्यों आ रही है| अब सैनिकों ने साउथ के राजा का, साथ देने का, फ़ैसला कर लिया है और आगे भी, उसी के आदेश के अनुसार, काम करेंगे| इस बात से, राजा दुखी हो जाता है लेकिन, अब भी उसे, अपनी गलती समझ में नहीं आ रही थी| राजा अपने राज्य की सेना को ही, आरोप लगा रहा था कि, “उसके सैनिकों ने, उसे धोखा दिया है|” वह ग़ुस्सा दिखाते हुए, रानी को लेकर, जंगल की तरफ़, एक गुप्त स्थान में चला जाता है| राजा टूट चुका था| अब उसके पास, न कोई सेना थी और न ही, सेना बनाने का सामर्थ्य| राजा, अपनी क़िस्मत को कोसते हुए, वहीं सो जाता है और कुछ घंटों के बाद, जैसे ही, उसकी नींद खुलती है| रानी वहाँ से जा चुकी होती है| राजा, रानी को ढूंढने की बहुत कोशिश करता है लेकिन, रानी का कुछ पता नहीं चलता| कुछ ही हफ्तों में, राजा की हालत, एक भिखारी की तरह हो जाती है|

राजा और रानी
Image by Kasun Chamara from Pixabay

राजा फटे पुराने वस्त्र पहनकर, अपनी रानी को ढूंढने के लिए, दर बदर भटकने लगता है| राजा के पास, जीने का एक ही सहारा रानी के रूप में बचा था लेकिन, अब उसने भी उसका साथ छोड़ दिया था| एक दिन तंग आकर राजा, अपनी जान देने के लिए, नदी में छलांग लगा देता है लेकिन, उसकी क़िस्मत, इस बार भी, उसका साथ नहीं देती| उसी वक़्त, कुछ सैनिक, रानी की पालकी लेकर, निकल रहे होते हैं और वह पानी में डूबते हुए आदमी को देख, उसे बचा लेते हैं| राजा की जान बच जाती है लेकिन, वह इस बात से ख़ुश नहीं था| राजा अपनी ज़िंदगी से हताश, ज़मीन पर लेटा हुआ था| उसी बीच, एक रानी पालकी से उतरती है और राजा की हालत पर तरस खाकर, उसे खाने के लिए, कुछ फल देती है और वहाँ से वापस, अपनी पालकी में बैठकर जाने लगती है| रानी को देखते ही, राजा ज़मीन में हाथ पटक पटक कर रोने लगता है क्योंकि, यह रानी, कोई और नहीं बल्कि, इसकी पत्नी थी| जिसने, दक्षिण के राजा से, विवाह कर लिया था और फिर से, विजयगढ़ की रानी बन गई थी| राजा अपना सब कुछ हार चुका था| उसकी भोग विलास की आदत ने उससे, उसका सब कुछ, छीन लिया था| पहली बार उसे, अपनी ज़िंदगी में पछतावा हो रहा था| जिसके बाद वह, गुमनामी के अंधेरे में, डूब जाता है और उसकी ज़िंदगी का अध्याय समाप्त हो जाता है|

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