लकड़बग्घा (Lakadbaggha)- bachho ke liye anokhi kahaniyan

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लकड़बग्घा (Lakadbaggha)- bachho ke liye anokhi kahaniyan in hindi:

एक जंगल में, अधिक हरियाली होने की वजह से, बहुत से शाकाहारी जानवर वहाँ रहते थे| सभी की दुनियाँ ख़ुशहाल थी| उसी जंगल में, एक हिरण का परिवार भी रहता था| हिरण पूरे जंगल में, घास खाते हुए घूमते रहते| इस जंगल में, सबसे बड़ा प्राणी हाथी था जो, बिना किसी से मतलब रखें, अपने ही दुनिया में मदमस्त, जंगल में विचरण करता रहता| जंगल में फलों की कोई कमी नहीं थी| सभी के लिए, कुछ न कुछ मौजूद था| इस जंगल में, बंदर भी पेड़ों की टहनियों में बैठकर, स्वादिष्ट फलों का मज़ा लेते थे| जब तक परिस्थितियां अनुकूल थी तब तक, सभी का जीवन सामान्य चल रहा था लेकिन, जैसे ही एक दिन, जंगल में एक लकड़बग्घे (Lakadbaggha) की दस्तक होती है, जंगल का माहौल बदल जाता है| लकड़बग्घा बहुत ही ख़ूँख़ार जानवर होता है जिसे, आक्रामक शिकारी माना जाता है| जंगल में लकड़बग्घे के घुसते ही, सभी जानवरों में सन्नाटा छा जाता है| कुछ तो उसे देखते ही, दुम दबाकर भागने लगते हैं|

लकड़बग्घा (Lakadbaggha) animal ki kahani
Image by Ralph from Pixabay

यह जंगल अभी तक, केवल शाकाहारी जानवरों से भरा था लेकिन, अब लकड़बग्घा उनके जीवन में, ख़लल डालने आ चुका था और सभी के अस्तित्व पर, ख़तरा छा गया था| हिरणों को सबसे पहले, अपने ऊपर ख़तरा नज़ारा आ रहा था इसलिए, वह बंदर से मदद की गुहार लगाने पहुँचे लेकिन, बंदर ने सोचा, “मैं तो पेड़ के ऊपर रहता हूँ| मुझे क्या करना|” उसने हिरणों की मदद करने से इनकार कर दिया और फल खाने में लग गया| हिरण एक जगह से निराश होकर, हाथी के पास पहुँचे, हाथी बहुत ताक़तवर जानवर था लेकिन, वह बहुत सीधे और सरल स्वभाव का था हालाँकि, वह अपनी रक्षा करने में सक्षम था इसलिए, उसने कहा, “मुझे तुम्हारे पचड़ों में नहीं पड़ना, मैं अपनी ज़िंदगी मैं मस्त हूँ| जब कोई मुझसे उलझेगा, तब मैं देख लूंगा|” दोनों जगह से मदद न मिलने पर, हिरण का परिवार निराश हो चुका था लेकिन, तभी उन्हें एक खरगोश दिखाई दिया| उन्होंने खरगोश से मदद माँगी, खरगोश मदद के लिए तैयार हो गया लेकिन, वह लकड़बग्घे से लड़ने में सक्षम नहीं था इसलिए, उसने हिरणों को, अपने साथ ज़मीन के अंदर, सुरंगों में रहने का सुझाव दिया लेकिन, हिरण खुली हवा में घूमने वाले जानवर है इसलिए, वह भला गड्ढों के अंदर कैसे रहते? हिरणों ने तय किया कि, “यदि उन्हें बचना है तो, इस जंगल के बाहर ही जाना होगा, नहीं तो लकड़बग्घा (Lakadbaggha) उनके परिवार को खा जाएगा और अगले ही दिन, हिरण अपने परिवार की सुरक्षा की ख़ातिर, जंगल छोड़कर भाग गया| कुछ ही दिनों में, लकड़बग्घों की संख्या बढ़ने लगी|

लकड़बग्घा (Lakadbaggha)- bachho ke liye anokhi kahaniyan
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जंगल में छोटे जीव जन्तुओं का जीना दूभर हो चुका था| लकड़बग्घे, इतने आक्रामक हो चुके थे कि, अब हाथी और बंदरों को भी, उनसे डर लग रहा था| बंदरों को कभी न कभी पेड़ के नीचे आना पड़ता और उसी पल, लकड़बग्घे उन पर हमला कर देते हैं जिससे, उन्हें कई बार चोटें आ चुकी थीं| वह लकड़बग्घों के आतंक से, परेशान होने लगे| शाकाहारी पशुओं की, सीधी सादी ज़िंदगी एकदम बदल चुकी थी| अब लकड़बग्घों का राज, पूरे जंगल में होता जा रहा था जिससे, जंगल में रहने वाले शाकाहारी जानवर, एक एक करके जंगल छोड़ते जा रहे थे और जब पानी सर से ऊपर हो गया तो, हाथी और बंदर को भी, मजबूरी में अपने ख़ूबसूरत से जंगल को छोड़कर जाना पड़ा| आज उस जंगल में चारों तरफ़, केवल लकड़बग्घे ही राज करते हैं| अपने घर को छोड़ते ही, हाथी को एहसास हो चुका था कि, ताक़त केवल अपनी रक्षा के लिए ही नहीं बल्कि, दूसरों की सुरक्षा के लिए भी, इस्तेमाल की जानी चाहिए, तभी सभी लोग सुकून से रह सकते हैं|

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