वस्त्र (Vastra)- मोटिवेशन स्टोरी

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वस्त्र (Vastra) नई कहानियां दिखाइए- मोटिवेशन स्टोरी हिन्दी में (Top 10 story):

नई कहानियां दिखाइए– आजकल सोशल मीडिया में, वीडियो बनाने के लिए, लड़के लड़कियों की होड़ लगी है| आज ज़्यादातर लड़के, सोशल मीडिया व्यूअर्स को, शब्दों की मर्यादाओं का, उल्लंघन करते हुए, बेहुदा कंटेंट दिखाने में, लगे हुए हैं और वहीं, अधिकतर लड़कियाँ, अपने शरीर को आकर्षक दिखाने के लिए, भड़काऊ वस्त्र(Vastra) पहनकर, अश्लीलता परोसने में लगी हुई हैं| ऐसी ही एक लड़की, जिसका नाम नमिता था| वह अपने स्कूल के दिनों में तो, बहुत सीधी सादी लड़की थी लेकिन, कॉलेज की हवा लगते ही, नमिता बदल चुकी थी| दरअसल, उसने कई लड़कियों की देखा देखी में, अपना जीवन असामान्य कर लिया था| नमिता एक बहुत बड़ी सोशल मीडिया स्टार बनना चाहती थी| इसलिए उसने, रोज़ाना नए नए कपड़े पहनकर, वीडियो बनाना शुरू कर दिया| नमिता को आए दिन, अच्छे कपड़ों की ज़रूरत पड़ती थी इसलिए, वह अपनी सहेलियों के कपड़े, माँग कर इस्तेमाल कर लिया करती थी| हालाँकि, इस बात से नमिता की सहेलियाँ, उससे चिढ़ने लगी थीं लेकिन, नमिता को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था| धीरे धीरे नमिता के कपड़े, उसके हर वीडियो में, छोटे होते जा रहे थे लेकिन, उसके फॉलोअर्स तेज़ी से बढ़ रहे थे| नमिता इस बात से बहुत ख़ुश थी| उसे लग रहा था कि, उसके अंदर बहुत बड़ा हुनर है इसलिए, लोग उसके वीडियो, ज़्यादा पसंद कर रहे हैं लेकिन, यह तो सिर्फ़, उसका भ्रम था जो, बहुत जल्द टूटने वाला था| कुछ ही महीनों में, नमिता पूरी तरह “मॉडर्न गर्ल” बन चुकी थी| दरअसल, वह बहुत जल्दी, इतनी फ़ेमस हो चुकी थी कि, कई कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार के लिए, नमिता को चुनने लगी थीं जिससे, उसे अच्छी ख़ासी आमदनी भी होने लगी| अच्छी कमाई की वजह से, नमिता ने बहुत ही जल्दी अपना ख़ुद का घर ख़रीद लिया था| जिसमें वह अकेले ही रहती थी| धीरे धीरे नमिता के शौक़ बढ़ते जा रहे थे| देर रात तक पार्टी करना, महंगे से महंगे कपड़े ख़रीदना और अय्याशी भरा जीवन गुज़ारना, उसकी आदत बन चुकी थी| एक बार, देर रात पार्टी करने के बाद, वह अपने एक दोस्त के साथ, उसकी कार में अपने घर लौट रही थी अचानक, कार का संतुलन बिगड़ जाता है और कार, एक पेड़ से जा टकराती है|

वस्त्र (Vastra) story in hindi
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इस दुर्घटना में, नमिता बुरी तरह ज़ख़्मी हो चुकी थी लेकिन, उसका दोस्त होश में था इसलिए, वह उसे तुरंत अस्पताल ले जाने में क़ामयाब हो जाता है और नमिता की जान, बच जाती है लेकिन, इस दुर्घटना में नमिता का चेहरा, बुरी तरह बर्बाद हो चुका था| होश में आते ही, नमिता अपने चेहरे को देखकर, चीखने लगती है| ऐसा लग रहा था जैसे, नमिता की तो मानो, दुनिया ही उजड़ चुकी हो| कुछ घंटे तक रोने के बाद, नमिता थक जाती है जिससे, उसे नींद आ जाती है| नमिता के दुर्घटना की ख़बर, सोशल मीडिया पर, आग की तरह फैलती है| देखते ही देखते, हज़ारों लोगों की भीड़, हॉस्पिटल में इकट्ठी हो जाती है| नमिता के होश में आते ही, सभी उसे देखना चाह रहे थे लेकिन, नमिता अपना चेहरा, किसी को नहीं दिखाना चाहती थी इसलिए, वह लोगों से मिलने को, मना कर देती है लेकिन, इसी बीच एक व्यक्ति, चुपके से नमिता की फ़ोटो, खींच लेता है और सोशल मीडिया में, वायरल कर देता है| नमिता का चेहरा, कुरूप हो चुका था इसलिए, कई लोग उसे, बुरा भला कहने लगे थे क्योंकि, नमिता के ज़्यादातर फॉलोअर्स, उसके बेहुदा कपड़ों से, पहले ही नाराज़ रहते थे और अब उन्हें, मौक़ा मिल चुका था, उसे नीचा दिखाने का| नमिता को, जैसे ही सोशल मीडिया में, अपना कुरूप चेहरा नज़र आता है| वह अपना मोबाइल फेंक देती है और चादर से, अपना चेहरा छुपाकर, फूट फूटकर रोने लगती है| दरअसल, अपना चेहरा बर्बाद होने की वजह से, नमिता पूरी तरह टूट चुकी थी और अब, उसने तय कर लिया था कि, अस्पताल से निकलते ही, अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर देगी| कई दिनों के इलाज के बाद, अस्पताल से नमिता की छुट्टी हो जाती है| उसकी देखभाल करने के लिए, अस्पताल की तरफ़ से, एक नर्स उसके साथ भेजी जाती है ताकि, नमिता की अच्छी देखभाल की जा सके| हालाँकि, वह नर्स को अपने साथ, अपने घर नहीं ले जाना चाहती लेकिन, सोशल मीडिया स्टार होने की वजह से, अस्पताल कोई ख़तरा नहीं उठाना चाहता था इसलिए, मजबूरी में उन्हें नमिता की देखभाल के लिए, एक नर्स भेजनी पड़ती है| जैसे ही, वह नर्स के साथ अपने घर पहुँचती है, सबसे पहले, अपने घर के सारे शीशे निकाल देती है ताकि, उसे अपना बदसूरत चेहरा, बार बार न देखना पड़े| सारी रात नमिता, अपने बिस्तर में पड़े पड़े रोती रहती है और सुबह होते ही, नर्स को बिना बताए, अपने घर से अकेले ही निकल जाती है| काफ़ी दूर पैदल चलते हुए, वह एक वीरान नदी के पुल के ऊपर पहुँचती है|

मोटिवेशन स्टूडेंट स्टोरी हिन्दी में (Top 10 story)
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नमिता ने पूरी तरह से मन बना लिया था कि, अब वह इस चेहरे के साथ जीना नहीं चाहती और अगले ही पल, वह पुल के ऊपर चढ़ने की कोशिश करने लगती है लेकिन, इसी बीच एक व्यक्ति, उसे पुल पर जाते देख लेता है| वह दौड़कर, नमिता को कूदने से रोक लेता है| नमिता उससे, अपना हाथ छुड़ाने की बहुत कोशिश करती है लेकिन, वह नमिता को ऐसा नहीं करने देता| तभी नमिता के चेहरे से, कपड़ा हट जाता है जिससे, नमिता अपना चेहरा छुपाने लगती है| वह व्यक्ति, नमिता के कुरूप चेहरे को देखते ही, उसके इस फ़ैसले की वजह, समझ जाता है| वह तुरंत, उसका हाथ छोड़ देता है और उससे कहता है, “चेहरे के कपड़े के साथ साथ, अपने कपड़े भी उतार दो|” नमिता को, उसकी यह बात समझ में नहीं आती| उसे लगता है कि, “यह व्यक्ति उसे अकेला पाकर, उससे बतमीजी कर रहा है” लेकिन, वह अपनी बात को दोहराते हुए कहता है, “मैं तुमसे कह रहा हूँ, अपने सभी कपड़े उतार दो| इस दुनियाँ ने, अपने स्वार्थ के लिए, तुम्हें स्त्री रूपी कपड़े पहना रखे थे इसीलिए, तुम अपनी सुंदरता को, सबसे ज़्यादा महत्व दे रही थी और चेहरे के, कुरूप होते ही, तुम्हे अपना जीवन भी, कुरूप लगने लगा| तुम शरीर नहीं हो, जो उसके बदलने से, दुखी हो रही हो| अगर तुम, उन सभी वस्त्रों को उतार दो, तो तुम अपनी असली शक्ति पहचान पाओगी| अभी तुम सिर्फ़, अपने चेहरे के बदलने से, अपनी जान देना चाहती हो क्योंकि, तुमने सिर्फ़ अपने तन को ही महत्व दिया है और उसका सबसे बड़ा कारण है कि, तुम्हें अपने वास्तविक ताक़त का, एहसास ही नहीं| तुम्हें यह समझना होगा कि, तुम इस सृष्टि की विराट चेतना हो|” नमिता उस व्यक्ति की बातें, ध्यान से सुन नहीं थी| उसे ऐसा लग रहा था जैसे, यह व्यक्ति उसकी ज़िंदगी की किताब ही पड़ रहा हो| नमिता ने, जिज्ञासा करते हुए कहा, “मैं एक सोशल मीडिया स्टार थी लेकिन, अब मेरे चेहरे की वजह से, मेरा सब कुछ ख़त्म हो गया| अब मैं क्या करूं|” वह व्यक्ति कहता है, “एक गायक यदि, अपनी आवाज़ जाने से, पागल हो जाए या एक धावक, अपने पैर टूटने से, विक्षिप्त हो जाए तो, इसका मतलब उन्होंने, एक इंसान की असली शक्ति को पहचाना ही नहीं| दरअसल, शरीर तो सिर्फ़ एक माध्यम है जिसका, सदुपयोग करके हमें, सार्थक कामों के लिए, समर्पित होना चाहिए था लेकिन, जब हम किसी शारीरिक गुण को, स्वयं से जोड़ लेते हैं तो, वह हमारी कमज़ोरी बन जाता है| शरीर तो गुणों का सागर है| क्या हुआ, यदि तुम्हारा चेहरा बदल गया| अभी तो तुम्हारे पास सृष्टि की अपार संपदा है| तुम्हारा दिमाग़, जो तुम्हारी असली ताक़त है| नमिता उन्हें बीच में रोकते हुए, अपनी ज़िंदगी का लक्ष्य पूछती है| वह कहता है, “तुम्हारा लक्ष्य तुम्हें ही तय करना होगा लेकिन, अपना लक्ष्य समाज या किसी व्यक्ति, अथवा वस्तु के संयोगिक परिस्थिति के, चश्मे को पहनकर, तय मत करना| दुनिया ने तुम्हें, अपनी नज़रों में कुछ भी समझ रखा हो, तुम्हें दुनिया की नज़र से, अपने आप को नहीं देखना है बल्कि, अपने आपको एक श्रेष्ठ काम करने के लिए प्रेरित करना है लेकिन, तुम्हारा लक्ष्य तुम्हारे शारीरिक दिखावे और स्वार्थों से, हटकर होना चाहिए क्योंकि, जिस्म तो कभी भी बदला जा सकता है तो, यह सच कैसे हो सकता है? सच तो वह है जो, कभी ना बदलें| तभी तुम, बिना दुख के, जीवन का आनंद ले सकोगी क्योंकि, इंसान का होना ही दुख है| तो तुम्हें, कुछ बनना नहीं बल्कि, समझना होगा| नमिता की आंखें खुल चुकी थी| उसे समझ में आ चुका था कि, उसने अपने जीवन में क्या खोया है| अब नमिता तैयार थी, अपनी नई बंधन मुक्त ज़िंदगी जीने के लिए|

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