संख्या (sankhya) – moral education story

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संख्या (sankhya) – moral education story for youth:

आज के युवाओं में, अपने फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने की होड़ लगी हुई है| तरीक़ा कोई भी हो, सभी सम्मान पाना चाहते हैं| युवाओं के लिए संख्या बढ़ाना तो केवल बहाना है, असल में तो अपनी पहचान बनाना है| इसी राह पर एक और युवा लड़का बढ़ चुका था, जिसका नाम रुस्तम था| वह दिखने में ग़ज़ब का ख़ूबसूरत था| साथ साथ वह शारीरिक तौर पर भी बहुत मज़बूत था| वह अपने आपसे बहुत प्यार करता था| वह अपने पहनावे को लेकर हमेशा कुछ न कुछ बेहतर करने की कोशिश में लगा रहता था| उसे एक तरह का डर था कि, अगर किसी ने उसे अजीब से पहनावे में देख लिया तो, उसके चाहने वालों की संख्या कम हो जाएगी| रुस्तम कहीं भी जाता, उसके चाहने वालों का क़ाफ़िला उसके पीछे चलने लगता| रुस्तम सोशल मीडिया स्टार बन चुका था| बड़े बड़े TV शो और न्यूज़ चैनल्स रुस्तम की तारीफ़ करते, नहीं थक रहे थे और यह सब केवल उसके फॉलोअर्स की संख्या की वजह से हो रहा था, लेकिन रुस्तम इसे अपनी निजी सफलता समझ रहा था और यहीं उससे सबसे बड़ी भूल होने वाली थी| एक दिन रुस्तम विज्ञापन की शूटिंग के लिए, स्टूडियो जा रहा था| शूटिंग के लिए उसने, लग्ज़री ब्रांडेड कपड़े पहने थे| वह दिखने में किसी अरबपति की तरह दिखाई दे रहा था| जैसे ही रुस्तम की गाड़ी स्टूडियों के सामने रूकती है, वैसे कुछ मीडिया वाले, फोटोशूट की डिमांड करते हैं| रुस्तम को पहले ही पॉपुलर होना पसंद था, जिसके लिए वह कोई मौक़ा नहीं छोड़ता था तो, भला यहाँ कैसे पीछे रहता| वह तुरंत खड़े होकर पोज देना शुरू कर देता है और कई फ़ोटो खींचने के बाद, वह विज्ञापन की शूटिंग के लिए चला जाता है| अगली सुबह, रुस्तम अपने घर में मोबाइल पर विडियो स्क्रॉल कर रहा था, अचानक से उसे उसका एक वीडियों दिखाई दिया, जिसमें उसके पैंट के पीछे एक प्राइस टैग लटक रहा था और लोग उसका मज़ाक बना रहे थे| इतना देखते ही वह घबराने लगता है और उसके चेहरे का रंग बदल जाता है| रुस्तम तुरंत अपने मैनेजर को फ़ोन लगाता है और पूछता है कि, “यह मेरा कैसा वीडियो वायरल हो रहा है?” तभी रुस्तम का मैनेजर बताता है कि, “कल आप फोटोशूट पर गये थे, तभी यह रिकॉर्ड हुआ होगा, लेकिन आपको पता चलने से पहले, मैंने वह प्राइस टैग निकाल दिया था| मुझे लगा नहीं था कि, फोटोग्राफर्स इतनी छोटी सी बात का मज़ाक बनाएंगे|” तभी रुस्तम ग़ुस्से में कॉल काट देता है|

sankhya
Image by Hilary Clark from Pixabay

रुस्तम के मोबाइल में, हज़ारों मेसेज उसका मज़ाक उड़ा रहे होते हैं| रुस्तम को पहली बार बढ़ती हुई संख्याओं से डर लग रहा था| वह अपना मोबाइल बंद कर देता है और कई दिनों तक अपने घर में ही घुसा रहता है| रुस्तम का मैनेजर, उससे संपर्क करने की बहुत कोशिश करता है, लेकिन रुस्तम उसकी किसी भी बात का जवाब नहीं देता| रुस्तम गहरे डिप्रेशन में जा चुका था| कई दिन गुज़रने के बाद, मामला ठंडा हो चुका था, लेकिन इस घटना ने रुस्तम को अंदर से तोड़ दिया था| रुस्तम के कई दिनों से, सोशल मीडिया में एक्टिव ना रहने की वजह से, उसके फॉलोअर्स की संख्या घटने लगी थी, हालाँकि रुस्तम को अब इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था दरअसल उसे लगने लगा था कि, उसे जानने वालों की संख्या, जितनी कम होगी, उसकी उतनी कम बेइज़्ज़ती होगी| वह गुमनामी के अंधेरे में डूब जाना चाहता था, इसलिए परेशान होकर, एक दिन वह अपने शहर से दूर निकल जाता है| चलते चलते अचानक उसकी गाड़ी ख़राब हो जाती है| रुस्तम गाड़ी स्टार्ट करने की बहुत कोशिश करता है लेकिन, वह असफल रहता है| रुस्तम अपनी गाड़ी से नीचे उतरता है तो, उसकी नज़र सड़क के किनारे, एक ख़ूबसूरत गाँव पर पड़ती है| गाँव हरे हरे पेड़ों से भरा हुआ, पक्षियों की चहचहाट के बीच, किसी स्वर्ग से कम नहीं लग रहा था|

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Image by siam naulak from Pixabay

इतना मनमोहक दृश्य देखते ही, रुस्तम के पैर गाँव की ओर खींचने लगते हैं| गाँव के अंदर प्रवेश करते ही, रुस्तम को एक अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है| रुस्तम ने पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था, जैसा उसे इस गाँव में हो रहा था| गाँव के अंदर कुछ बच्चे बेफिक्र होकर मिट्टी में खेल रहे थे और बच्चों को खेलता हुआ देख, बुजुर्ग खिलखिलाकर हंस रहे थे| यह घटना अपने आप में अजीब थी क्योंकि, साधारण तौर पर बच्चों को मिट्टी में खेलता देख, बड़े बुजुर्ग हमेशा उन्हें रोकते हैं लेकिन, यहाँ का नज़ारा ही कुछ और था| रुस्तम के मन में यह सब देखकर जिज्ञासा उत्पन्न होने लगती है| वह तुरंत उन बुजुर्ग व्यक्तियों के पास जाकर खड़ा हो जाता है और उनसे इस गाँव के माहौल बारे में पूछने लगता है| रुस्तम के इतना पूछते ही, सभी उसे सम्मान के साथ बैठने को कहते हैं और उसके स्वागत में खाने पीने की चीज़ें लाकर, उसके सामने रख देते हैं| रुस्तम गाँव के लोगों का, अजनबियों के प्रति, ऐसा व्यवहार देखकर, अचंभित रह जाता है क्योंकि, आज तक की ज़िंदगी में, उसने केवल स्वार्थ ही देखा था| आज पहली बार वह, बिना किसी बात के सम्मान पा रहा था| रुस्तम से ज़्यादा देर रहा नहीं जाता| वह सभी के सामने हाथ जोड़कर पूछता है कि, आप लोग इतना ख़ुश कैसे रह सकते हैं| इस गाँव में तो शहर की तरह कोई सुविधाएँ भी नहीं है| न ही इंटरनेट है और न ही बिजली, फिर भी यहाँ इतना अच्छा क्यों लग रहा है| रुस्तम को परेशान देख, गाँव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति खड़े होते हैं और उससे बताते हैं कि, तुम्हें इस गाँव में लोगों की संख्या कम लग रही होगी, दरअसल यहाँ का एक नियम है| यहाँ के लोग एक दूसरे को अलग अलग नहीं समझते| इस गाँव का एक भी बच्चा यदि सुख सुविधाओं से वंचित है तो, इस गाँव में आगे कोई बच्चा पैदा नहीं किया जाता| पहले जो पैदा हो चुका है, उसे जीवन जीने लायक मूलभूत सुविधाएँ दी जाती है और उसके बाद, यदि सभी में सामर्थ हुआ तो, आगे इस गाँव की आबादी बढ़ती है| हम सब यह मानते हैं कि, ये पूरी दुनिया एक है और यहाँ रहने वाले सभी जीव जन्तु या इन्सानो में केवल एक का ही निवास है और यदि कोई दुखी है तो, सभी दुखी होंगे ही| फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि, पहले वह परिस्थिति किसी और की थी और अब तुम्हारी है, लेकिन यदि तुम सभी को एक मानते तो, किसी का नुक़सान तुम्हारा फ़ायदा कभी नहीं बनता और यही इस गाँव की ख़ुशी का राज है| रुस्तम बुजुर्ग की बातों से काफ़ी प्रभावित हो चुका था| वह उनसे एक आख़िरी सवाल और पूछता है कि, “वह हमेशा ख़ुश कैसे रह सकता है?” तभी बुजुर्ग मुस्कराते हुए कहते हैं कि, “दुनिया में अलग अलग संख्याएं ढूँढना बंद कर दो| सभी को एक में सम्मिलित करो| जब कोई तुमसे अलग है ही नहीं तो, तुम्हें किसी और की बात से क्या फ़र्क पड़ता है| तुम अपने आपको मन में बुरा कहते हो तो, क्या तुम्हें वास्तविक बुरा लगता है? तो फिर कोई और कहता है तो, क्यों लगा? क्योंकि तुम उसे अलग समझते हो| इस प्रकृति में संख्या नहीं असंख्या खोजना सीखो| अपने आप तुम अपनी दुनिया बदलने में क़ामयाब हो जाओगे|” रुस्तम को उसका जवाब मिल गया था| इसी के साथ रुस्तम की कहानी नया रुख़ चुकी थी|

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