होशियार बकरी – Bakri ki Kahani

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होशियार बकरी – Bakri ki Kahani in hindi

बकरियाँ हमारे बीच रहने वाली सबसे सामान्य प्राणी हैं| इंसानों और बकरियों का रिश्ता समझाने हेतु एक होशियार बकरी की कहानी(Bakri ki Kahani) प्रस्तुत है| नदी के किनारे पहाड़ी क्षेत्र में एक गड़रिया रहता था| उसके पास बहुत सी बकरियां थी और उन्हीं में से एक बकरी भी थी| जो बहुत होशियार थी बचपन से ही वह बाक़ी बकरियों की तुलना में ज़्यादा समझदार थी| दरअसल कई बार वह अपने दल से अलग हो जाती लेकिन कठिन से कठिन रास्तों को पार करके, वह गड़रिए तक पहुँच जाती थी| उसकी यही क्षमता उसे बाक़ी बकरियों से ज़्यादा अक्लमंद बनाती थी| एक दिन बारिश के समय गडरिया नदी पार करके सभी बकरियों को घास चराने ले जाता है| नदी का बहाव तेज था लेकिन वह बकरियों को नदी पार कराने में क़ामयाब हो जाता है|

Bakri ki Kahani
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कुछ घंटे पहाड़ पर रहने के बाद बारिश तेज़ होने लगती है| गडरिए को लगता है कि कहीं ऐसा ना हो नदी का बहाव और तेज़ हो जाए और मैं यहाँ अपनी बकरियों के साथ फँस जाऊँ वह जल्दी जल्दी सभी बकरियों को इकट्ठा करके वापस नदी के किनारे पहुँचता है लेकिन इस बार पानी का बहाव तेज हो चुका था| उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी बकरियों को कैसे नदी पार कराए| वह एक पेड़ के नीचे परेशान होकर बारिश में भीगते हुए बैठ जाता है| तभी होशियार बकरी उसके पास आती है और उछल कूद करने लगती है| गडरिया पहले से ही परेशान था और यह बक़री भी तो उसे भी परेशान करने लगी| तभी उसने अपनी बकरी को दूर भगाने के लिए छोटा सा पत्थर उठाकर मारा लेकिन बकरी उछलकूद करना बंद नहीं करती| गडरिया इस बकरी की समझदारी के बारे में पहले से जानता था इसलिए उसे लगता है कि बकरी कुछ कहना चाहती है| वह बकरी को प्यार से पुचकारते हुए बुलाता है| अचानक बकरी वहाँ से थोड़ा दूर जाने लगती है| गड़रिया बकरी के पीछे पीछे चल देता है| थोड़ा दूर पहुँचते ही बकरी नदी के ऊपर गिरे हुए पेड़ के पास पहुँच जाती है और उसके ऊपर चढ़कर धीरे धीरे नदी पार करने लगती है| गडरियों को देखकर बहुत ख़ुशी होती है कि चलो नदी पार करने का एक रास्ता तो मिला| वह सभी बकरियों को पेड़ के पास इकट्ठा कर लेता है लेकिन इसी बीच बारिश और तेज होती जा रही थी| गड़ेरिया सबसे पहले अपनी बकरियों को पेड़ के ऊपर से एक एक करके नदी पार करवा देता है लेकिन जब वह पेड़ के ऊपर चढ़ता है| तब अचानक पेड नदी के अंदर समा जाता है और गड़रिया बाल बाल बचता है| गडरिया समस्या में फँस चुका था हालाँकि उसने अपनी बकरियों को सुरक्षित कर दिया था| सारी बकरियां नदी के दूसरी तरफ़ पहुँच गई थी| गडरिया नदी के इसी पार से अपनी बकरियों को घर जाने का इशारा करता है लेकिन बकरियाँ अपने मालिक के बिना वहाँ से हिलने को तैयार नहीं थी| इसी बीच होशियार बकरी उछलते हुए नदी के दूसरी तरफ़ और आगे बढ़ने लगती है|

होशियार बकरी
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गडरिए को लगता है कि यह बकरी कोई न कोई रास्ता ज़रूर ढूँढेगी वह भी उसका पीछा करते हुए नदी के दूसरी तरफ़ से आगे बढ़ने लगता है| थोड़े ही दूर नदी में एक जगह गहरा पानी होने की वजह से बहाव कम होता है| लेकिन गड़ेरिए को नदी में कूदने से डर लग रहा था| दरअसल उसे अंदाज़ा नहीं था कि अंदर कितनी गहराई होगी| लेकिन उसका डर ख़त्म करने के लिए होशियार बकरी पानी में छलांग लगा देती है और तैरते हुए गड़रिए के पास पहुँच जाती है| बकरी की बहादुरी देख गड़रिए का आत्मविश्वास बढ़ जाता है और वह तुरंत पानी में अपनी बकरी के साथ फिर से छलांग लगाता है और धीरे धीरे तैरते हुए दोनों नदी के किनारे पहुँच जाते हैं| होशियार बकरी ने अपने मालिक की जान बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की थी और उसका यही भावना उसे सबसे ख़ास बनाती है| गडरिए को अपनी बकरी की होशियारी की वजह से नया जीवनदान मिला था| वह होशियार बकरी को अपनी गर्दन में उठाए हुए, सभी बकरियों के साथ अपने घर वापस पहुँच जाता है|

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