घोड़े की वफादारी | baccho ki kahani | Animal kahani

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घोड़े की वफादारी | baccho ki kahani | Animal kahani:

एक गाँव में एक धोबी रहता था, जिसके पास एक घोड़ा था, जिस पर बैठकर, वह घर घर से कपड़े, इकट्ठा करके तालाब के किनारे, धोने जाया करता था | उसके घोड़े में एक ख़ास बात थी, कि कई बार, धोबी के बिना भी, घोड़ा कपड़ों को घर घर पहुँचा आता था | गाँव के सभी लोग घोड़े की वफादारी ( baccho ki Animal kahani ) की मिसाल देते थे | आज तक घोड़े की वजह से एक भी कपड़ा इधर का उधर नहीं हुआ था | उसके घोड़े की चर्चा दूर दूर तक थी | एक दिन गाँव में राजा की बेटी आती है, जिसका विवाह जल्द ही होने वाला था, इसलिए धोबी को राजमहल बुलवाया जाता है और उसे महल के सारे कपड़े, धोने का काम मिलता है | धोबी बहुत ख़ुश होता है, चलो आज राजमहल के कपड़े धोऊंगा तो, कुछ पैसे ज़्यादा ही मिलेंगे | धोबी, अपने घोड़े के साथ, महल में पहुँचता है और बड़ी सी पोटली बनाकर, अपने घोड़े के ऊपर बाँध देता है और हमेशा की तरह, घोड़ा अकेले ही तालाब की ओर निकल जाता है | राजा, धोबी को आदेश देते हैं कि राजकुमारी की शादी है | कपड़े समय से धोकर ले आना | धोबी जवाब देते हुए कहता है, “जी महाराज”! धोबी ख़ुशी ख़ुशी तालाब के किनारे, पहुँचता है, लेकिन वहाँ केवल उसका घोड़ा मौजूद होता है |

baccho ki kahani
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लेकिन कपड़े की पोटली, तालाब के आस पास, कहीं दिखाई नहीं देती | धोबी परेशान हो जाता है और घोड़े के पास जाता है और इशारों में पोटली के बारे में पूछता है, लेकिन घोड़ा वही उचकने लगता है | धोबी को कुछ समझ नहीं आता, कि घोड़ा क्या कहना चाहता है और इसने कपड़े की पोटली कहाँ गिरा दी | वह सोचता है कि, राजा साहब तो, मुझे जान से मार देंगे | धोबी भागते हुए, अपने गाँव पहुँचता है और गाँव के हर घर में जाकर कपड़े की पोटली के बारे में पूछता है | उसे पूरा यक़ीन था, कि घोड़े ने गलती से वह पोटली, किसी के घर में दे दी होगी, लेकिन सारा गाँव छानने के बाद भी, कपड़ों की पोटली का कहीं पता नहीं चलता | धोबी सोचता है, राजा को जाके, सब सच बताना होगा, क्योंकि जितनी देर होगी, राजा साहब उतना ही नाराज़ होंगे, अगर यह बात पता चलेगी, कि उनके कपड़ों की पोटली मुझसे खो गई है | धोबी अपने घोड़े पर बैठ कर, राजमहल पहुँचता है और दरबार में जाकर, राजा के सामने सारी बात कह देता है | राजा क्रोध से आग बबूला हो जाते हैं और वे आदेश देते हैं | धोबी को गिरफ़्तार कर लिया जाए और जब तक कपड़े की पोटली का पता नहीं चलता, तब तक इसे कारागार में ही बंद रहने दिया जाए | धोबी राजा की बात सुनते ही, ज़मीन पर लेट जाता है और हाथ जोड़ कर, राजा के सामने विनती करने लगता है | राजा साहब मुझे माफ़ कर दीजिए, मैं कहीं से भी, आपके कपड़ों की पोटली ढूंढ के लाऊँगा, लेकिन राजा धोबी की, एक भी बात नहीं सुनता और राजा के सैनिक, उसे पकड़कर कारागार में डाल देते हैं | घोड़ा यह सब, देख रहा होता है और कुछ देर बाद घोड़ा, वहाँ से निकल आता है | धोबी की गिरफ़्तारी की ख़बर, सारे गाँव में फैल जाती है | सभी को पूरा यक़ीन हो जाता है कि, धोबी अब जीवन भर, कारागार में ही रहेगा, लेकिन लोगों को यह भी चिंता होती है, कि उसके घोड़े का क्या होगा | तभी घोड़ा गाँव में प्रवेश करता है और अपने घर, जहाँ वह धोबी के साथ रहता था | वहीं जाकर बैठ जाता है | घोड़े की आँखों में आँसू, साफ़ साफ़ नज़र आ रहे होते हैं | घोड़ा अपने मालिक की गिरफ़्तारी से, बहुत दुखी था, लेकिन वह बेज़ुबान, किसी से कुछ कह नहीं सकता था | तभी राज महल में कपड़ों की चोरी से, राजकुमारी के विवाह की तैयारियाँ फीकी पढ़ने लगती है | राजकुमारी, ग़ुस्से से अपने पिताजी से कहती है, “आप बहुत लापरवाह हैं पिताजी! ऐसे समय पर गलती की, जिसके लिए मैं, आपको कभी क्षमा नहीं करूँगी, क्योंकि उन कपड़ों में, मेरे भी कुछ रेशमी वस्त्र थे, जिसे मैंने परदेश से मंगाया था | आपको, कपड़े ऐसे इंसान को नहीं देना चाहिए, जो इतना लापरवाह था” | राजकुमारी की बात से, राजा और अधिक क्रोधित हो जाता है और आवेश में ही, धोबी को फाँसी पर लटकाने का आदेश देता है और साथ में, यह भी कहता है कि, इसे गाँव में सबके सामने फाँसी की सजा दी जाए, ताकि हर गलती करने वाले को, पहले से ही उसकी सज़ा का एहसास हो | राजकुमारी के विवाह से ठीक दो दिन पूर्व, धोबी को फाँसी देना तय किया जाता है और वह दिन आ जाता है | सारे गाँव के लोग, धोबी की बेबसी पर दुखी हो रहे होते हैं, क्योंकि सबको पता था, गलती उसकी नहीं, उसके घोड़े की है, लेकिन सजा उसे मिल रही है, क्योंकि घोड़े की ज़िम्मेदारी, उसी धोबी की है और उसके किये गये कार्यों की सजा भी धोबी को ही मिलेगी | चारों तरफ़, भीड़ का हुजूम लगा होता है और गाँव के बीचों-बीच धोबी को फाँसी के लिए लाया जाता है | धोबी की आँखों में आँसू और चिंता की लकीरें साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी | वह बहुत दुखी था | राजा के सैनिक, उसे ज़ोर से खींचते हुए, फाँसी के फंदे के पास लाकर, खड़ा कर देते हैं |

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उसके चेहरे पर काला कपड़ा डाला जाता है | फाँसी की सारी तैयारी होते ही, इंतज़ार होता है, राजा के आदेश का है और सारे गाँव के शोर शराबे के बीच, राजा फाँसी का आदेश देने ही वाले होते हैं कि अचानक, धोबी का घोड़ा कपड़े की पोटली, मुँह में दबाए हुए, राजा के सामने पहुँच जाता है | राजा अपने कपड़ों की पोटली देख प्रसन्न हो जाता है और धोबी को फाँसी के फंदे से, हटाने का आदेश देता है, लेकिन सभी के मन में यह सवाल उठ रहा होता है, कि आख़िर कपड़े कैसे मिले ? तभी पीछे राजा के सैनिक, भागते हुए आ रहे होते हैं और वह आते ही, जल्दबाज़ी में बताते हैं, कि हमारे राजमहल के द्वारपाल ने, कपड़ों की पोटली की चोरी की थी | जब धोबी, महल में कपड़े लेने आया था और उसके घोड़े पर कपड़े रखकर बाहर भेजे गए थे, तभी राजमहल के द्वार पर ही, द्वारपाल ने कपड़े की पोटली गिरा दी थी और छुपाकर वही रखे हुए थे | जैसे ही राजा को, सच्चाई का पता चला तो, राजा को अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ | उसने तुरंत धोबी को ससम्मान, राज्य का ईमानदार नागरिक घोषित किया और अपने कोषाध्यक्ष को, आदेश दिया कि, धोबी को स्वर्ण अशर्फ़ियों के साथ, कुछ आभूषण भी दिया जाए और साथ ही साथ उसके घोड़े के लिए, क़ीमती हार दिए जाए | इस गाँव के सभी लोग, राजा के इस फ़ैसले से उत्साहित हो जाते हैं और ख़ुशी से उछलने लगते हैं | तभी धोबी, अपने घोड़े को गले से लगाता है और उसके साथ अपने घर की ओर चल देता है |

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